कोलकाता में सरेआम 'किस ऑफ़ लव'

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पिछले रविवार को कोच्चि में जो नहीं हो सका वह बुधवार को कोलकाता स्थित जादवपुर विश्वविद्यालय के छात्रा-छात्राओं ने किया.

‘संघी गुंडे होशियार, तेरे सामने करेंगे प्यार’, के नारे लगाते हुए सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने विश्वविद्यालय परिसर से हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर 'किस ऑफ़ लव' रैली निकाली और कोई पांच सौ मीटर दूर स्थित जादवपुर थाने के सामने ही चौराहे पर एक-दूसरे का कस कर चुंबन लिया.

यातायात थमा

इस दौरान यातायात रुका रहा. हज़ारों लोग और पुलिसवाले हतप्रभ यह नज़ारा देखते रहे. बाद में छात्र रैली की शक्ल में ही वहां से चले गए.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से सार्वजनिक स्थान पर चुंबन के विरोध और कोच्चि में हुई घटना के समर्थन में छात्रों ने पहले ही इस रैली का ऐलान कर दिया था.

लेकिन कोलकाता में न तो संघ कहीं सक्रिय नज़र आया और न ही पुलिस.

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विश्वविद्यालय परिसर में कैंटीन के सामने पूरे दिन छात्र-छात्राएं रैली के लिए पोस्टर तैयार करने में जुटे रहे. उन लोगों ने मुखौटे भी तैयार किए थे.

मॉरल पुलिसिंग के ख़िलाफ़

छात्रों का कहना था कि वे मॉरल पुलिसिंग के ख़िलाफ़ हैं.

छात्रा आत्रेयी चटर्जी कहती है, ‘कोच्चि में जो कुछ हुआ वह गलत और असंवैधानिक है. किस करना कोई अश्लील हरकत नहीं है. यह प्यार की निशानी है.’

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उन्होंने कहा कि कोच्चि के युवाओं के समर्थन और संघ के ख़िलाफ़ ही रैली निकाली गई है.

एक अन्य छात्रा अरुणिमा आचार्य कोलकाता में इसी सप्ताह की एक घटना का हवाला देती हैं जब छोटी स्कर्ट पहनने की वजह से एक युवती को कोलकाता नगर निगम के नियंत्रण वाले स्टार थिएटर में नहीं घुसने दिया गया.

वह कहती है कि मौजूदा दौर में ऐसी घटनाएं अप्रासंगिक हैं. वह भी किस करने को अपना मौलिक अधिकार मानती हैं.

'दकियानूसी मिसाल'

छात्र निर्लीप पाल का मानना है कि किस करने पर रोक लगाना दकियानूसी की मिसाल है. उन्होंने कहा कि आज के युवा अपने तरीके से जीने और प्यार का इज़हार करने को आज़ाद हैं.

इंजीनियरिंग की छात्रा दियोत्तमा पाल कहती है, ‘पूरे देश में भगवा ब्रिगेड के उभार के बाद केरल से कोलकाता तक मॉरल पुलिसिंग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं.’

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'किस आफ लव रैली' पौने पांच बजे विश्वविद्यालय परिसर से निकलकर थाने की ओर बढ़ी. शुरुआत में छोटी-सी नजर आ रही यह रैली धीरे-धीरे लंबी होती गई.

रैली के चौराहे पर पहुंचने पर यातायात थम गया. छात्र-छात्राओं ने वहीं खड़े होकर एक-दूसरे को किस करना शुरू कर दिया.

फूहड़ता!

नरेंद्र पाल जैसे कुछ लोगों को यह नजारा दिलचस्प लगा तो 70 साल की गायत्री देवी को इसमें फूहड़ता नज़र आई.

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गायत्री देवी कहती हैं, ‘सरेआम चौराहे पर एक-दूसरे को चूमने की यह संस्कृति पता नहीं देश को कहां ले जाएगी ? अब तो युवा पीढ़ी का भगवान ही मालिक है."

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