सेना ने ली किशोरों की मौत की ज़िम्मेदारी

मारे गए किशोरों के परिजन इमेज कॉपीरइट RIYAZ MASROOR

भारत प्रशासित कश्मीर में बडगाम ज़िले के चत्तरगाम इलाक़े में बीते सोमवार एक सुरक्षा नाक़े के पास सेना की गोलीबारी में दो युवकों की मौत पर सेना ने कहा है कि ये घटना 'ग़लत पहचान' की वजह से हुई.

शुक्रवार को सेना की उत्तरी कमान के कमांडर, लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा ने कहा, ''सूचना मिली थी कि सफ़ेद रंग की एक कार में चरमपंथी मौजूद हैं. इस मामले में पहचान करने में चूक हुई. हम मौत की ज़िम्मेदारी लेते हैं.''

उन्होंने कहा कि इस मामले में अगर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो इसके लिए ज़िम्मेदार सैन्य अधिकारियों के ख़िलाफ़ 10 दिन के भीतर निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाएगी.

अलग-अलग दावे

घटनास्थल पर तैनात सेना की राष्ट्रीय राइफ़ल्स का दावा है कि उन्होंने सफ़ेद रंग की कार को रुकने का संकेत दिया था लेकिन जब वो नहीं रुकी और तब उस पर गोलियां चलाई गईं थीं.

कार में पांच किशोर सवार थे जिनमें से दो की मौत हो गई थी, दो को चोट आई थी और एक किशोर भाग गया था.

गोलीबारी में मारे गए ज़ाहिद अयूब एक फैक्टरी में काम करते थे, जबकि दूसरा किशोर फ़ैसल यूसुफ छात्र था.

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Image caption कश्मीर घाटी में भारतीय सेना पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं

मारे गए किशोरों के परिवार वालों का आरोप है कि सेना के जवानों ने बिना कोई चेतावनी दिए कार पर गोलियां चलाईं.

वहीं राज्य सरकार की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सैनिकों की ओर से गोलियां चलाए जाने के बाद कार फिसलकर बिजली के खंभे से टकराई थी.

इलाक़े से राष्ट्रीय राइफ़ल्स को हटा दिया गया है. घटना के विरोध में कश्मीर घाटी में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं.

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