महिला हेल्पलाइन: फोन ही नहीं मिलता है..

मध्य प्रदेश महिला पुलिस इमेज कॉपीरइट SHURIAH NIAZI

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के नूतन कॉलेज में पढ़ने वाली शिखा के साथ कुछ लड़कों ने कुछ दिन पहले छेड़छाड़ करने की कोशिश की.

उन्होंने 'निर्भया पैट्रोलिंग' के फोन नंबर पर शिकायत करने की कोशिश की, लेकिन फोन मिला ही नहीं.

निर्भया पैट्रोलिंग की शुरुआत पिछले साल दिसंबर में हुई थी.

सिर्फ़ निर्भया पैट्रोलिंग ही नहीं, शिकायत तो यह भी है कि महिलाओं को प्रताड़ना से बचाने के लिए 2010 में शुरू की गई हेल्पलाइन 1091 में भी अब कॉल नहीं लगती.

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आंकड़ों के हिसाब से हेल्पलाइन 1091 से कुल मिलाकर 8,735 महिलाओं को मदद मिली थी. लेकिन फिर इसे एक थाने से दूसरे थाने में शिफ्ट किया गया और उसके बाद या तो इसमें कॉल कनेक्ट नहीं होती और अगर होती भी है तो वो इंदौर के किसी निजी नंबर पर.

'नीयत सही नहीं'

शिखा ने बीबीसी को बताया, "लड़कियों की सुरक्षा के लिए सरकार ने कई अच्छे काम शुरू किए थे लेकिन वो सिर्फ नाम के ही रह गए हैं. जब हमें मदद चाहिए होती है तो मिल ही नहीं पाती."

पुलिस अधिकारी इसकी वजह स्टाफ़ की कमी बताते हैं.

भोपाल के पुलिस उपमहानिरीक्षक डी श्रीनिवास वर्मा कहते हैं, "महिला अधिकारियों के ट्रांसफ़र के बाद हमारे पास स्टाफ़ की कमी है, जिससे दिक्क़त आ रही है. हम जल्द ही इसे दूर करेंगे."

लेकिन, भोपाल शहर में आज भी लगभग 200 महिला पुलिस अधिकारी और कर्मचारी काम कर रही हैं.

सामाजिक संगठन से जुड़े लोग मानते हैं कि सरकार की नीयत ही सही नहीं है.

Image caption भोपाल निर्भया पुलिस कार्रवाई की फ़ाइल फ़ोटो

सामाजिक संगठन विकास संवाद से जुड़ी रोली शिवहरे कहती हैं, "महिलाओं के लिए योजना बनाने वाले सभी पुरुष हैं, जो सिर्फ़ औपचारिकता के लिए ये सब कर रहे हैं. मध्य प्रदेश में पिछले कुछ सालों से महिला नीति ही नहीं बनी है."

घरेलू हिंसा

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार मध्य प्रदेश देश में महिला बलात्कार के मामलों में अव्वल है.

प्रदेश में साल 2013 में 2012 के मुक़ाबले महिलाओं के ख़िलाफ़ घरेलू हिंसा के लगभग 1,000 मामले ज़्यादा सामने आए हैं.

यही नहीं, अभिनेता आमिर खान के भोपाल में शुरू किए गए वन स्टॉप क्राइसेस सेंटर फ़ॉर वीमेन में हर महीने लगभग 400 शिकायतें मिल रही हैं.

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