झांसीवाली ही रहेंगी रानी लक्ष्मीबाई

झांसीवाली रानी लक्ष्मीबाई इमेज कॉपीरइट DEVIDAS DESHPANDEY

रानी लक्ष्मीबाई को झांसीवाली की बजाय दूसरा नाम देने की मांग मुंबई उच्च न्यायालय ने ठुकरा दी.

ख़ुद को लक्ष्मीबाई का वंशज बताने वाले व्यक्ति की अपील ठुकराते हुए न्यायालय ने कहा कि विवादित तथ्यों को सुलझाने के लिए यह पर्याप्त मामला नहीं है.

याचिकाकर्ता विवेक तांबे ने पुणे में एक पुतले के नीचे नाम की तख्ती देखने के बाद यह याचिका दायर की थी. विवेक तांबे का दावा है कि वे लक्ष्मीबाई के दूर के रिश्तेदार अनंत तांबे के वारिस हैं.

इमेज कॉपीरइट DEVIDAS DESHPANDEY

उन्होंने मांग की थी कि लक्ष्मीबाई को झांसीवाली की बजाय नेवालकर कहा जाना चाहिए. पुणे शहर में रानी का पुतला है जिसके नीचे तख्ती पर उनका नाम लक्ष्मीबाई झांसीवाली लिखा है.

'अधिकार का हनन'

तांबे के अनुसार उन्होंने लक्ष्मीबाई पर एक किताब लिखी है. उनका निधन 1858 में हुआ था और उनका उपनाम झांसीवाली होने का एक भी समकालीन सबूत उन्हें नहीं मिला.

हालांकि, उनके गोद लिए हुए बेटे ने अपना नाम नेवालकर से बदलकर झांसीवाले किया था.

इमेज कॉपीरइट DEVIDAS DESHPANDEY

इस विषय को लेकर तांबे ने पुणे नगर निगम को भी पत्र लिखे लेकिन नगर निगम ने कहा कि संबंधित पुतला सन् 1957 में बनाया गया था और रानी लक्ष्मीबाई के नाम को लेकर उनके पास कोई दस्तावेज़ नहीं है.

तब तांबे ने न्यायालय में गुहार लगाई. लेकिन न्यायाधीश ए एस ओका और एएस गडकरी की पीठ ने याचिका को यह कहकर खारिज कर दिया कि संविधान की धारा 226 के तहत इस तरह के तथ्यों का निर्णय करने का अधिकार उन्हें नहीं है.

विवेक तांबे का कहना है, "संविधान हर नागरिक को सम्मानित जीवन का अधिकार देता है. मेरे पूर्वज का नाम बदलने से मेरे इस अधिकार का हनन हुआ है. कोर्ट के फैसले पर मैं कानूनी राय ले रहा हूं और उसके बाद ही आगे के कदम पर निर्णय लूंगा."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार