कश्मीर मुठभेड़: सात सैनिकों को उम्रक़ैद

इमेज कॉपीरइट AP

भारतीय सेना के सूत्रों के मुताबिक़ चार साल पहले हुई एक कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ के मामले में दो अधिकारियों समेत सात लोगों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई है.

मुठभेड़ में कथित रूप से तीन निर्दोष लोगों की मौत हो गई थी. इसके विरोध में अलगाववादियों ने लंबे समय तक आंदोलन किया था.

हालांकि इसकी अभी आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है.

सेना का इनकार

कश्मीर में सेना के प्रवक्ता एनएन जोशी ने कहा, "हमें इसके बारे में जानकारी नहीं है. जो ख़बरें दी जा रही हैं, वो आधिकारिक बयान नहीं है. सेना के किसी भी दफ़्तर ने कोई बयान जारी नहीं किया है."

इमेज कॉपीरइट
Image caption भारतीय सेना ने इस ख़बर की अभी आधाकारिक रूप से पुष्टि नहीं की है

सेना ने 30 अप्रैल 2010 को दावा किया था कि श्रीनगर से क़रीब सौ मील दूर नियंत्रण रेखा के पास माछिल गांव में हुई मुठभेड़ में तीन घुसपैठिए मारे गए थे.

जिन लोगों के मुठभेड़ में मारे जाने का दावा किया गया था, उनकी पहचान बारामुला ज़िले के नादीहाल गांव के निवासी शहज़ाद अहमद ख़ान, रियाज़ अहमद लोन और मोहम्मद शफ़ी लोन के रूप में हुई.

परिजनों का आरोप

इमेज कॉपीरइट Riyaz Masroor

मृतकों के परिजनों ने आरोप लगाया कि सेना उन्हें नौकरी देने का लालच देकर सीमा पर ले गई थी. बाद में उनकी हत्या कर उन्हें चरमपंथी घोषित कर दिया गया.

ख़बरों में जम्मू-कश्मीर और नई दिल्ली स्थित सैन्य सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि जनरल कोर्ट मार्शल (जीसीएम) में सात लोगों को दोषी ठहराया गया है.

जिन पर इस फर्जी मुठभेड़ में शामिल होने का आरोप है वे हैं चौथी राजपूत रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफ़िसर कर्नल डीके पठानिया, कैप्टन उपेंद्र सिंह, सूबेदार सतबीर सिंह, हवलदार वीर सिंह, सिपाही चंद्रभान, सिपाही नागेंद्र सिंह और सिपाही नरेंद्र सिंह (चौथी राजपूत रेजीमेंट के लोग ही इसमें शामिल थे). टेरिटोरियल आर्मी के जवान अब्बास हुसैन शाह को जीसीएम ने बरी कर दिया था.

कोर्ट ऑफ इंक्वायरी

इमेज कॉपीरइट AP

कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया इस साल जनवरी में शुरू हुई थी और सितंबर में ख़त्म हुई.

इन सैनिकों को नागरिकों की हत्या करने, षड्यंत्र रचने और मारे गए लोगों को पाकिस्तानी बताने के आरोप का दोषी पाया गया.

इस मामले पर सेना ने कोर्ट ऑफ इंक्वायरी भी गठित की थी. आरोप पत्र में बशीर अहमद लोन और अब्दुल हामिद बट नाम के दो नागरिकों का भी नाम है. दोनों पर बारामुला सत्र अदालत में मुक़दमा चलाया जा रहा है.

जम्मू कश्मीर पुलिस ने 15 जुलाई 2012 को सोपोर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था. इसमें सेना के आठ जवानों, टेरfटोरियल आर्मी के एक जवान और दो नागरिकों को धारा-302 के तहत अभियुक्त बनाया गया था.

मुठभेड़ में मारे गए रियाज़ अहमद के भाई ने इस ख़बर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "आज जो आर्मी ने फ़ैसला सुनाया है, उससे हम तो ख़ुश हैं. लेकिन इन सबको फांसी की सजा होनी चाहिए, जिससे पूरी दुनिया को इसका पता चले और ऐसे लोग फिर न उठें. जब इन्हें फांसी होगी तो हमें और ख़ुशी होगी, क्योंकि हमें आज तक इंसाफ नहीं मिला."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार