कांग्रेस और मोदी के बीच फंसे नेहरू

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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू की 125वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में (बिना नाम लिए) नरेंद्र मोदी सरकार पर प्रहार किए.

कांग्रेस कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ ताकतें देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की विरासत को नष्ट कर रही हैं.

इसी सभा में उनके बेटे और पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी मोदी पर निशाना साधा.

राहुल ने नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को केवल फ़ोटो खिंचाने और पब्लिसिटी कराने का कार्यक्रम बताया है.

ऐसा लगता है कि चुनावों में ज़बरदस्त हार के बाद पहली बार कांग्रेस खुलकर भाजपा और प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ सामने आई है.

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आज जिस तरह से पार्टी कार्यकर्ताओं ने धर्मनिरपेक्षता की शपथ ली, उससे साफ़ है यह उनका मनोबल बढ़ाने की कोशिश है.

'मोदी पर फ़र्क़?'

कांग्रेस ने 17 और 18 नवंबर को होने वाली नेहरू कॉंफ्रेंस में प्रधानमंत्री को निमंत्रण न देने का फ़ैसला किया है. हालांकि कांग्रेस ने नेहरू कांफ्रेंस के लिए विभिन्न देशों से 55 नेताओं को बुलाया है.

प्रधानमंत्री को नज़रअंदाज़ करने पर ज़ाहिर है विवाद खड़ा होना ही था. इसे कई हलकों में प्रधानमंत्री का अपमान समझा जा रहा है.

भाजपा ने इसे इज़्ज़त का सवाल बनाया तो मोदी के समर्थकों ने इसे कांग्रेस का 'छोटापन' कहा.

निष्पक्ष राय यह है कि मोदी पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं केवल भाजपा के नहीं इसलिए उन्हें नहीं बुलाना उनका अपमान करने जैसा है.

नरेंद्र मोदी को न्योता न भेजने का कांग्रेस पार्टी का फ़ैसला समझ में आता है. पिछले आम चुनाव के बाद महाराष्ट्र और हरयाणा में पार्टी की ज़बरदस्त शिकस्त से पार्टी की साख काफी कमज़ोर हुई है और इससे कार्यकर्ताओं का हौसला पस्त नज़र आता है.

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इसका कारण हैं नरेंद्र मोदी, जिन्होंने 'कांग्रेस मुक्त भारत' का बीड़ा उठा रखा है.

इतना ही नहीं कांग्रेस इस बात से भी तिलमिलाई हुई है कि सरदार पटेल और महात्मा गांधी को मोदी उससे छीनने की कोशिश कर रहे हैं.

मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले कांग्रेस यह मानती रही थी कि गांधी और पटेल की विरासत उसकी जागीर है, देश की नहीं.

नरेंद्र मोदी ने सरदार पटेल के जन्मदिन को राष्ट्रीय एकता दिवस में बदल दिया और गांधी जयंती पर स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया.

लेकिन राजनितिक विशेषज्ञ कहते हैं कि प्रधानमंत्री ने इन दोनों अहम दिवसों को जनता से जोड़कर ये विरासत जनता के हवाले कर दी है, जो अब कांग्रेस को वापस नहीं मिलने वाली.

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इस पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री को निमंत्रण न देना स्वाभाविक मालूम होता है.

लेकिन कांग्रेस के नज़रअंदाज़ करने से क्या नरेंद्र मोदी की सेहत पर कोई फ़र्क़ पड़ेगा?

भाजपा से मिलता-जुलता एक मत यह है कि मोदी पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं इसलिए उन्हें बड़े समारोहों में न बुलाना उनका अपमान है.

लेकिन कुछ लोग ये भी राय रखते हैं कि इससे प्रधानमंत्री को और भी सहानुभूति मिल सकती है. दोनों सूरत में प्रधानमंत्री की सेहत पर शायद कोई फ़र्क़ न पड़े.

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