शिक्षकों की हाज़िरी लगाएगी मशीन

देहरादून का डीएवी कॉलेज इमेज कॉपीरइट SHIV JOSHI

उत्तराखंड में सरकारी और ग़ैरसरकारी डिग्री कॉलेजों में जल्द ही अध्यापकों को बायोमेट्रिक मशीन में उपस्थिति दर्ज करानी होगी.

नैनीताल हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि राज्य के ऐसे सभी 70 कॉलेजों में यूजीसी के मानकों के अनुसार शिक्षण कार्य सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक मशीनें लगाई जाएं.

न्यायाधीश वीके बिष्ट और न्यायाधीश यूसी ध्यानी की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए.

दौलतराम सेमवाल ने पिछले साल एक याचिका दायर कर आरोप लगाया गया था कि कॉलेजों से शिक्षकों के नदारद रहने के कारण शिक्षा की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ रहा है.

विरोध में आवाज़

अदालत के इस आदेश से शिक्षकों में हड़कंप मचा हुआ है. राजधानी देहरादून के डीएवी पीजी कॉलेज के शिक्षकों और कुछ अन्य कॉलेजों के शिक्षकों ने इसके विरूद्ध हस्ताक्षर अभियान छेड़ दिया है.

डीएवी कॉलेज के चीफ़ प्रॉक्टर कौशल कुमार कहते हैं, "ये शिक्षकों की गरिमा के ख़िलाफ़ है. शिक्षक सिर्फ़ पढ़ाते ही नहीं है बल्कि शोध भी करते हैं, फ़ील्ड में जाते हैं, पढ़ाने की तैयारी करते हैं और उनके काम के घंटे को किसी मशीन से नहीं आंका जा सकता."

हालाँकि राज्य के कई निजी कॉलेजों में पहले से ही ये व्यवस्था है. एक निजी विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग के प्रोफ़ेसर डॉक्टर एसके गुप्ता कहते हैं, "शिक्षकों को जवाबदेह बनाने की दिशा में ये एक अच्छा क़दम है. विरोध करने वाले वही लोग हैं जो काम से बचते हैं."

सरकार की सख्ती

पहाड़ी इलाक़ों में शिक्षा की बदहाली का एक बड़ा कारण शिक्षकों का स्कूलों से अनुपस्थित रहना माना जाता है.

Image caption उत्तराखंड सरकार सुदूर इलाक़ों के स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित करने पर ज़ोर दे रही है

शिक्षा मंत्री मंत्रीप्रसाद नैथानी के निर्देश पर इन दिनों सुदूर पहाड़ों मे स्कूलों का औचक निरीक्षण चल रहा है. बिना सूचना दिए अनुपस्थित पाए गए 67 शिक्षकों को पिछले दो दिनों में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. कुछ मामलों में उपस्थिति रजिस्टर में फ़र्जी हस्ताक्षर भी पाए गए थे.

शिक्षा मंत्री नैथानी कहते हैं, "लापरवाह शिक्षकों के प्रति कड़ी कार्रवाई की जाएगी. जब शिक्षक स्कूल में ही नहीं रहेगा तो छात्रों का विकास कैसे होगा."

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