बर्धवान विस्फोटः संदिग्ध बर्मावासी गिरफ़्तार

बर्धमान विस्फोट

भारतीय राष्ट्रीय जांच एंजेंसी (एनआईए) ने बर्धवान विस्फोट मामले में एक संदिग्ध ख़ालिद मोहम्मद को हैदराबाद से सोमवार को गिरफ़्तार किया. आशंका जताई जा रही है कि वे बर्मा के नागरिक हैं.

पश्चिम बंगाल में बर्धवान में 2 अक्तूबर को एक घर में हुए विस्फोट के बाद जमातुल मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) के समर्थन वाले बड़े चरमपंथी नेटवर्क का पता चला था.

ख़ालिद की गिरफ़्तारी के साथ ही जांचकर्ताओं को आईईडी, बम बनाने की प्रशिक्षण सामग्री और जिहादी साहित्य भी मिला है, जिसमें आईएस से जुड़ी सामग्री भी है.

एनआईए का कहना है, "शुरुआती पड़ताल से पता चला है कि ख़ालिद मोहम्मद बम और आईईडी बनाने का माहिर है. उसने तहरीक-ए-आज़ादी-अराकान और तहरीक-ए-तालिबान-पाकिस्तान से प्रशिक्षण लिया है. वह बांग्लादेश-म्यामांर सीमा के पास चरमपंथी शिविर चलाता रहा है."

'भारत में घुसपैठ'

ख़ालिद दूसरे विदेशी व्यक्ति हैं जिन्हें बर्धमान विस्फोट मामले में एनआईए ने गिरफ़्तार किया है. शेख रहमतुल्लाह उर्फ़ साजिद इस मामले में गिरफ़्तार होने वाले पहले व्यक्ति थे, जो बांग्लादेशी नागरिक हैं.

माना जाता है कि वे पश्चिम बंगाल और असम में जेएमबी की चरमपंथी गतिविधियों का नेतृत्व कर रहे थे.

आशंका जताई जा रही है कि ख़ालिद रोहिंग्या एकता संगठन के सदस्य हो सकते हैं. यह समूह बर्मा के अराकान इलाक़े में बसी मुस्लिम रोहिंग्या समुदाय के लिए संघर्ष कर रहा है.

एनआईए सूत्रों के अनुसार ख़ालिद भारत में रहने के लिए फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों का इस्तेमाल कर रहा था.

म्यामांर में रोहिंग्या मुसलमान और बौद्धों के बीच हिंसक संघर्ष चल रहा है और हज़ारों रोहिंग्या देश छोड़कर भाग गए हैं.

ज़्यादातर रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश के शरणार्थी कैंपों में रह रहे हैं लेकिन बहुत सीमापार कर भारत पहुंच गए हैं. सैकड़ों रोंहिग्या लोगों ने भारत प्रशासित कश्मीर में श्रीनगर के पास एक बस्ती बना ली है.

भारत के सीमा सुरक्षा बल से मिले ताज़ा आंकड़ों के अऩुसार भारत-बांग्लादेश सीमा से रोहिंग्या घुसपैठियों की संख्या में अचानक बढ़ोत्तरी हो गई है.

भारत के रक्षा प्रतिष्ठान को लगता है कि लश्कर-ए-तोएबा और अन्य चरमपंथी समूह रोहिंग्या को निशाना बना रहे हैं.

हाल ही में दिल्ली में हुई भारतीय और बांग्लादेशी गृह मंत्रालय के अधिकारियों की बैठक में बांग्लादेश को एक सूची सौंपी गई है जिसमें उन शिविरों का ब्यौरा है जिनमें चरमपंथी गुट रोहिंग्या शरणार्थियों को प्रशिक्षित कर रहे हैं.

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