रामपाल को आश्रम से निकालना मुश्किल: पुलिस

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हरियाणा पुलिस का कहना है कि संत रामपाल बरवाला में अपने आश्रम में ही हैं और पुलिस उन्हें बाहर निकाल कर अदालत ले जाने के लिए वचनबद्ध है, हालांकि ये एक 'बहुत मुश्किल अभियान' है.

जब मंगलवार को पुलिस ने अदालती अवमानना से जुड़े मामले में संत रामपाल को गिरफ़्तार करने की कोशिश की तो उनके समर्थकों की पुलिस से झड़पें हुई.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार पुलिस का कहना है कि झड़पों में लगभग सौ लोग घायल हुए हैं जिनमें रामपाल के समर्थक, मीडियाकर्मी और सुरक्षा बलों के जवान भी शामिल हैं.

घायलों को हिसार, बरवाला, अगरोहा और उलकाना के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.

अदालती अवमानना के आरोप में रामपाल के ख़िलाफ़ ग़ैर ज़मानती वारंट जारी हुआ है, लेकिन उनके हज़ारों समर्थकों ने कई दिनों से आश्रम के बाहर डेरा डाला हुआ है.

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के ओएसडी जवाहर यादव का कहना है कि मुख्यमंत्री स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं.

'मुश्किल अभियान'

हरियाणा के डीजीपी एसएन वरिष्ठ का कहना है कि उन्हें जो सूचना मिली है उसके मुताबिक़ रामपाल आश्रम के अंदर ही हैं.

उन्होंने कहा, "आश्रम के अंदर हमें बेहद आक्रमक समूह का सामना करना पड़ रहा है. हमें पता है कि आश्रम के अंदर महिला और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हैं. हमारी प्राथमिकता निर्दोष जानों को बचाना है."

उन्होंने इस अभियान को 'बहुत मुश्किल अभियान' बताया. उन्होंने झड़पों के दौरान मीडियाकर्मियों के घायल होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया.

कई लोगों का कहना है कि मीडियाकर्मी 'पुलिस के हमले' में घायल हुए. डीजीपी वरिष्ठ ने कहा कि कोई भी पुलिसकर्मी जानबूझ कर मीडिया वालों पर हमला नहीं करेगा.

वहीं हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि इस समस्या को शांतिपूर्वक तरीक़े से सुलझाना चाहिए. मीडियो को निशाना बनाए जाने की उन्होंने आलोचना की.

क्या है मामला

पुलिस का कहना है कि संत रामपाल के समर्थकों ने सतलोक आश्रम के अंदर से गोलियां चलाई हैं. रामपाल की गिरफ्तारी को रोकने के लिए कई दिनों से उनके समर्थक आश्रम के आसपास घेरा बनाए हुए थे.

टीवी रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने आंसू गैस और बुलडोज़र का इस्तेमाल करते हुए अंदर जाने की कोशिश की.

इस दौरान पुलिस ने रामपाल के समर्थकों पर लाठी चार्ज भी की. ये अभी स्पष्ट नहीं है कि किसी की गिरफ़्तारी हुई या नहीं.

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Image caption रामपाल खुद को कबीरपंथी बताते हैं

रामपाल को हत्या के एक मामले में अदालत में पेश होना है. उनके समर्थकों पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2006 में रोहतक में ग्रामीणों पर गोली चला दी थी जिसमें एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई जबकि कई घायल हो गए थे.

रामपाल को इसी मामले में पूछताछ के लिए कई बार समन भेजा गया. लेकिन उन्होंने इसकी बराबर अनदेखी की.

'क़ानून से ऊपर'

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार अदालत की तरफ़ से नियुक्त मध्यस्थ अनुपम गुप्ता का कहना है कि बारबार समन की अनदेखी के कारण ही रामपाल के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट जारी हुआ है.

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गुप्ता ने बताया, "रामपाल ने कहा है कि वो देश के क़ानून से ऊपर हैं. रामपाल और उनके समर्थकों ने सरकार और अदालत को खुली चुनौती दी है."

समर्थकों का कहना है कि रामपाल बीमार हैं और इसीलिए 250 किलोमीटर का सफ़र करके चंडीगढ़ नहीं जा सकते हैं.

अदालत ने हरियाणा के डीजीपी और गृह सचिव को 17 नवंबर तक रामपाल को अदालत में पेश करने का आदेश दिया था.

लेकिन संत रामपाल उस दिन भी पेश नहीं हुए जिसके बाद अदालत ने 21 नवंबर तक पुलिस को उन्हें अदालत में पेश करने की मोहलत दी है.

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