संत रामपाल के समर्थकों और पुलिस में झड़प

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हरियाणा के हिसार में संत रामपाल को गिरफ़्तार करने के लिए पहुंची पुलिस और उनके समर्थकों के बीच झड़पें हो रही हैं.

पुलिस का कहना है कि संत रामपाल के समर्थकों ने सतलोक आश्रम के अंदर से गोलियां चलाई हैं. पुलिस के अनुसार आश्रम के अंदर हथियारबंद लोग मोर्चा बनाए हुए हैं और उनकी तरफ़ से फ़ायरिंग के बाद पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की है.

संत रामपाल की गिरफ़्तारी के लिए पुलिस की कई कंपनियों ने आश्रम के बाहर घेरा डाल रखा है. पुलिस ने आश्रम की बिजली काट दी है और लोगों को वहां से चले जाने को कहा है.

लेकिन गिरफ़्तारी का विरोध कर रहे रामपाल के समर्थक सतलोक आश्रम के चारों ओर मानव श्रृंखला बनाकर बैठ हुए हैं. युवा समर्थकों ने हेलमेट पहन रखा है और उनके हाथों में लाठियाँ हैं.

दोनों ओर से हवाई फ़ायरिंग की ख़बरें हैं. कुछ मीडियाकर्मियों का आरोप है कि पुलिस ने उनके कैमरे छीन लिए हैं और कुछ लोगों को पीटा भी गया है.

इस बीच कोर्ट के सलाहकार (एमाइकस क्यूरी) अनुपम गुप्ता ने कहा कि उन्होंने अदालत से संत रामपाल की ज़मानत को तत्काल रद्द करने की अपील की है. अनुपम गुप्ता के अनुसार संत रामपाल अदालत और प्रशासन को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं इसलिए उनकी ज़मानत को फ़ौरन रद्द किया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि हरियाणा राज्य सरकार के अतिरिक्त एडवोकेट जनरल ने भी उनकी मांग का समर्थन किया है. अदालत ने फ़िलहाल अपना फ़ैसला सुरक्षित रखा है.

पूरा मामला

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने संत रामपाल के ख़िलाफ़ ग़ैरज़मानती वारंट जारी कर रखा है और पुलिस को अदालत ने आदेश दिए हैं कि वो संत रामपाल को गिरफ़्तार कर अदालत में पेश करे.

पिछले साल जुलाई में संत रामपाल के समर्थकों ने हत्या के मामले में एक पेशी के दौरान ज़िला अदालत की कार्रवाई में दख़लंदाज़ी की थी और वकीलों को अंदर जाने से रोका था.

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Image caption संत रामपाल के समर्थकों और पुलिस में संघर्ष

इसके बाद रामपाल के ख़िलाफ़ अवमानना का मामला दर्ज किया गया.

दरअसल, रामपाल पर हत्या का एक मामला चल रहा है. वर्ष 2006 में उनके समर्थकों ने रोहतक के ग्रामीणों पर गोली चला दी थी जिसमें एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई जबकि कई घायल हो गए थे.

अवमानना मामले में पिछले पांच नवम्बर को अदालत में पेशी थी, लेकिन रामपाल नहीं आए. बल्कि उनके चालीस हज़ार समर्थकों ने चंडीगढ़ में रेलवे स्टेशन को ठप कर दिया.

इसके बाद कोर्ट ने ग़ैरज़मानती वारंट जारी कर उन्हें 10 नवंबर तक हाई कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था.

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ रामपाल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, लेकिन यहां भी उन्हें निराश होना पड़ा.

अदालत ने हरियाणा के डीजीपी और गृह सचिव को 17 नवंबर तक रामपाल को अदालत में पेश करने का आदेश दिया था. लेकिन संत रामपाल उस दिन भी पेश नहीं हुए जिसके बाद अदालत ने 21 नवंबर तक पुलिस को उन्हें अदालत में पेश करने की मोहलत दी है.

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