आश्रमवाले अपना रहे हैं कई हथकंडे

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पुलिस ने मंगलवार शाम चार बजे संत रामपाल के आश्रम से उन लोगों को निकलने का समय दिया था, जो वहां से निकलना चाहते थे.

मंगलवार रात श्रद्धालुओं को तीन बसों में भरकर बस स्टेशन और रेलवे स्टेशन पहुंचाया गया. पुलिस ने पूरी रात आश्रम में कोई कार्रवाई नहीं की.

अभी भी आश्रम में सात-आठ हज़ार लोग मौजूद हैं.

सामान और पैसा

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आश्रम से निकलकर बाहर आए लोगों ने बताया कि लोग वहां से निकलना चाहते हैं, लेकिन बहुत से लोगों का सामान और पैसा आश्रम वालों ने अपने पास रखवा लिया है.

उन लोगों ने बताया कि कुछ लोगों के बच्चों को बदल दिया गया है. कुछ महिलाओं को उनके पतियों से अलग रखा गया है. ऐसे लोग आश्रम से निकल नहीं पा रहे हैं.

लोगों को यह कहकर भी डराया जा रहा है कि जैसे ही वो बाहर निकलेंगे पुलिस उन्हें गोली मार देगी.

हालाँकि कुछ लोग वहाँ से निकल भी रहे हैं.

लेकिन ये भी सच है कि बहुत से लोग बाबा के प्रति अपनी श्रद्धा की वजह से भी वहां रुके हुए हैं.

पुलिस और मीडिया

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पुलिस का मुख्य उद्देश्य आश्रम को ख़ाली कराना है. अगर बिना किसी कार्रवाई के श्रद्धालू वहां ले निकलते हैं, तो पुलिस इंतज़ार करेगी.

बुधवार सुबह आठ बजे से ही पुलिस आश्रम के बाहर पहुँचने लगी है.

मंगलवार को मीडियाकर्मियों पर हुई कार्रवाई के बाद जब मीडिया के कुछ लोग वहाँ पहुंचे तो पुलिस का रवैया काफ़ी नरम था.

मेरी जानकारी के मुताबिक़ मीडिया पर हुई कार्रवाई पूर्वनियोजित नहीं थी. जो भी हुआ, वह अचानक हुआ.

(बीबीसी संवाददाता मुकेश शर्मा से हुई बातचीत पर आधारित)

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