गिरफ़्तार रामपाल को कोर्ट ले जाया गया

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चंडीगढ़ स्थित पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने बरवाला से गिरफ़्तार किए गए रामपाल की ज़मानत रद्द कर दी है. वे हत्या के एक मामले में अभियुक्त हैं और वे दोपहर को कोर्ट में पेश हुए हैं.

बुधवार देर रात को हरियाणा के बरवाला में सतलोक आश्रम में कई घंटे चली पुलिस कार्रवाई के बाद बाबा रामपाल को गिरफ़्तार किया गया था.

देर रात हुई गिरफ़्तारी के बाद एक पुलिस एंबुलेंस में रामपाल को पंचकुला के सरकारी अस्पताल ले जाया गया जहाँ उनकी मेडिकल जाँच हुई.

हरियाणा पुलिस के अनुसार उन्हें आश्रम से बुधवार को चार महिलाओं के शव और एक बच्चे का शव सौंपा गया था. आश्रम की ही एक महिला की स्थानीय अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई.

पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट ने कई दिन पहले बाबा रामपाल के ख़िलाफ़ ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी किया था लेकिन उनके कई समर्थक उनकी गिरफ़्तारी का विरोध कर रहे थे.

इस बीच, गिरफ़्तार बाबा रामपाल ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को झूठा करार दिया है.

मीडिया के सवालों के जवाब में उन्होंने कहा, "सारे इल्जाम झूठे हैं. आश्रम में हथियारबंद लोग मेरे नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सेवा समाज समिति के थे."

2006 के एक हत्या के मामले में 2008 में रामपाल को ज़मानत मिली थी. लेकिन उसके बाद से वे एक बार भी अदालत में पेश नहीं हुए हैं.

लोगों ने धैर्य दिखाया: खट्टर

पुलिस कार्रवाई के दौरान, पहले से एक धार्मिक समागम बुलाए जाने के कारण आश्रम में हज़ारों की संख्या में लोग जमा थे.

हरियाणा पुलिस और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ़) ने आश्रम में संयुक्त अभियान चलाया.

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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने पुलिस कार्रवाई में सहयोग के लिए स्थानीय लोगों का शुक्रिया अदा किया. खट्टर ने ट्वीट किया, "भारी असुविधा के बावजूद स्थानीय लोगों ने धैर्य दिखाया और पुलिस का सहयोग किया."

हिसार में मौके पर मौजूद बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद ने बताया, "सतलोक आश्रम के आसपास पुलिस काफी संख्या में मौजूद है. पुलिस की कई गाड़ियां आश्रम वाली सड़क पर हैं."

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उन्होंने बताया कि आश्रम की कई इमारतों में अब भी पुलिस दाखिल नहीं हो पाई है, पुलिस को आशंका है कि इन इमारतों में बाबा के हथियारबंद समर्थक हो सकते हैं.

रामपाल पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद अदालत में पेश नहीं हुए थे जिसके बाद आश्रम में मौजूद उनके समर्थकों ने हरियाणा पुलिस के साथ संघर्ष का रास्ता चुना.

इस बीच, सतलोक आश्रम से गिरफ़्तार बाबा के 70 समर्थकों को बुधवार को हिसार की अदालत में पेश किया गया. अदालत ने उन्हें तीन दिसंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

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हरियाणा पुलिस के महानिदेशक एस एन वशिष्ठ ने बुधवार को आश्रम से चार महिलाओं और एक बच्चे का शव सौंपे जाने की बात कही थी.

'अंदर जाना बहुत मुश्किल था'

हिसार के डीएसपी विनोद कुमार ने बुधवार रात बीबीसी संवाददाता सुशीला सिंह को बताया था, "रामपाल को नौ बजकर पंद्रह मिनट पर गिरफ़्तार किया गया. दो दिन हमने सिर्फ़ भक्तों को ही बाहर निकाला. श्रद्धालु भी आक्रोश में थे. हमारे सामने बहुत चुनौतीपूर्ण स्थिति थी. आश्रम की दीवारें बहुत ऊँची थी. अंदर जाना बहुत मुश्किल था."

उन्होंने बताया, "अंदर कम ही श्रद्धालु रह गए थे. एक छोटा गेट था जिससे श्रद्धालु बाहर निकल रहे थे हमने उसी से अंदर प्रवेश किया."

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Image caption संत रामपाल के ख़िलाफ़ ग़ैर ज़मानती वारंट जारी हुआ था

भारी संख्या में श्रद्धालुओं के मौजूद होने पर उन्होंने कहा, "अदालत के वारंट के बाद तीन दिन का सत्संग रखकर श्रद्धालुओं को इकट्ठा किया गया था. रामपाल की गिरफ़्तारी रोकने के नाम पर श्रद्धालुओं को आश्रम में ही रोक लिया गया था."

पुलिस के बल प्रयोग के नाम पर उन्होंने कहा, "पुलिस ने बहुत सीमित बल प्रयोग किया है. पुलिस ने कोई फ़ायरिंग या लाठीचार्ज नहीं किया."

पुलिस की कार्रवाई के दौरान आश्रम से हज़ारों की संख्या में रामपाल के समर्थकों को हटाया गया.

क़ानून की नज़र में रामपाल फिलहाल एक अभियुक्त हैं जिनके ख़िलाफ गैर ज़मानती वारंट है.

कई संगीन आरोप

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अगस्त 2014 में हिसार ज़िला अदालत में रामपाल के समर्थकों ने काफ़ी हुड़दंग मचाया था. जिसके बाद पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने स्वत:संज्ञान लेते हुए उन्हें अदालत में पेश होने को कहा था और पूछा था कि उनकी ज़मानत क्यों न रद्द कर दी जाए.

सोनीपत के धनाणा गांव में 1951 को जन्मे रामपाल हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर थे.

नौकरी के दौरान ही रामपाल दास सत्संग करने लगे और 'संत रामपाल' बन गए. हरियाणा सरकार ने उन्हें 2000 में इस्तीफा देने को कहा. उसके बाद रामपाल ने करोंथा गांव में सतलोक आश्रम बनाया. जो फ़िलहाल सरकार के क़ब्ज़े में हैं.

हरियाणा में हिसार के पास बरवाला में स्थित इस आश्रम की ज़मीन को लेकर रामपाल पर कई आरोप लगे हैं.

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