ओबामा का भारत दौरा, 'पाक-चीन को संदेश'

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आगामी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा विशेष अतिथि के रूप में भारत आ रहे हैं.

उनकी इस यात्रा से दोनों देशों के बीच संबंधों के सुधरने का संकेत तो मिलता ही है, साथ ही एशिया में शांति स्थिरता को लेकर भारत के पड़ोसी देशों को भी संदेश जाता है.

संबंधों में एक लंबे ठहराव के बाद भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है.

यह चीन के लिए एक संदेश है कि दोनों देशों के संबंधों में जो दरार आ गई थी, वो अब ख़त्म हो गई है.

ओबामा और मोदी प्रशासन दोनों ही संबंधों को सुदृढ़ बनाने के लिए तैयार नज़र आते हैं.

बधाई

इस बात का संकेत तभी मिल गया था जब पिछले आम चुनावों में मोदी के जीतने पर ओबामा ने टेलीफ़ोन कर उन्हें बधाई दी थी.

अमरीकी राष्ट्रपति के भारत आगमन से पाकिस्तान को भी संदेश जाएगा कि इस क्षेत्र में स्थिरता के लिए भारत और पाकिस्तान को मिलकर काम करना होगा.

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Image caption ओबामा की यह यात्रा कई संदेश देती है.

अमरीका अफ़गानिस्तान से अपनी फ़ौज हटाने जा रहा है और इससे एक किस्म की अनिश्चितता का माहौल पैदा होने की संभावना है.

ओबामा इसीलिए आ रहे हैं कि भारत और अमरीका के बीच जो कुछ अंतरराष्ट्रीय मुद्दे हैं उन पर प्रगति हो.

संकेत

इस यात्रा से एशिया में शांति और स्थिरता, आतंकवाद, अफ़गानिस्तान के हालात आदि मुद्दों पर पाकिस्तान, चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया को भी एक संकेत जाएगा.

इसलिए गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होना केवल एक सम्मान का मामला नहीं है, बल्कि भारत और अमरीका मिलकर पूरे एशिया में स्थिरता को लेकर एक साथ काम करेंगे.

पूर्व की सरकार की विदेश निति अस्पष्ट थी, लेकिन जिस तरह मोदी चीन, पाकिस्तान, कश्मीर आदि पर साफ़-साफ़ स्टैंड लेते हैं, उससे अमरीका में विश्वास पैदा हुआ है कि इस सरकार के साथ संबंध काफ़ी मजबूत हो सकते हैं.

(बीबीसी संवाददाता संदीप सोनी से बातचीत के आधार पर)

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