अख़बारों के 'कठघरे में' रंजीत सिन्हा

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भारत की सर्वोच्च अदालत ने गुरुवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक रंजीत सिन्हा को 2जी घोटाले की जाँच से हटने का आदेश दिया है.

हिंदी और अंग्रेज़ी के क़रीब सभी अख़बारों में इस ख़बर ने पहले पन्ने पर जगह बनाई है.

हिंदी अख़बार अमर उजाला के मुताबिक सिन्हा के लिए ये तगड़ा झटका है, जबकि नई दुनिया अख़बार ने रंजीत सिन्हा का बयान छापा है, जिसमें उन्होंने कहा कि वो कोर्ट का आदेश मानेंगे.

अख़बार ने विशेष सरकारी वकील आनंद ग्रोवर का बयान भी दिया है जिसमें कहा गया है कि अगर 2जी मामले में सीबीआई निदेशक की बात मान ली गई होती तो ये केस गिर जाता.

जनसत्ता अख़बार ने लिखा है कि कोर्ट ने वहां नौ सीबीआई अफसरों की मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए कहा कि वो डायरेक्टर के एजेंट या प्रवक्ता नहीं हैं, इसलिए जाकर अपनी ड्यूटी करें.

पुराना रिकॉर्ड

नवभारत टाइम्स ने इस ख़बर को लीड बनाते हुए हेडिंग दिया है– सीबीआई चीफ पर गाज. अख़बार के मुताबिक़ रंजीत सिन्हा को पहली बार जांच से नहीं हटाया गया है.

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Image caption पूर्व केंद्रीय मंत्री डीएमके नेता ए राजा 2जी मामले के अभियुक्तों में से एक है.

इससे पहले पटना हाई कोर्ट ने 90 के दशक में उन्हें चारा घोटाले की जांच से अलग कर दिया था, क्योंकि उन पर लालू प्रसाद यादव की मदद का आरोप था.

अंग्रेजी अख़बार टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक पूरा पेज ही इस ख़बर को दिया है. इसके अलावा पहले पन्ने पर एक बॉक्स में कहा है कि रंजीत सिन्हा सुप्रीम कोर्ट में अलग-थलग खड़े थे क्योंकि उनकी ख़ुद की एजेंसी ने ही उनके इन आरोपों पर सवाल खड़े किए हैं जिनमें उन्होंने अपने एक अधिकारी को जासूस कहा था.

टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपने संपादकीय में कहा है कि इस आदेश को अगर बारीकी से समझें तो सिन्हा ने अपनी ही एजेंसी पर कीचड़ उछाला है. इन्हीं वजहों से सीबीआई की साख जनता की नज़र में गिर गई है.

अख़बार के मुताबिक सीबीआई निदेशकों पर पहले भी सवाल उठे हैं लेकिन एजेंसी के 51 साल के इतिहास में यह पहली बार है कि किसी निदेशक पर सुप्रीम कोर्ट ने इतनी कड़ी टिप्पणी की हो.

अख़बारों की सलाह

अंग्रेजी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स ने अपने संपादकीय में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश 2जी जांच में लोगों का यक़ीन वापस लाएगा.

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अख़बार ने सीबीआई के निदेशक के क़दम को देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी के माथे पर कलंक बताया है. अख़बार ने उम्मीद जताई है कि अदालत के इस आदेश के बाद शायद अधिकारी अपना काम बग़ैर किसी डर के कर पाएंगे.

हिंदी अख़बार दैनिक जागरण ने अपने संपादकीय में हैरत जताई है कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ़ से 2जी जांच से हटाए जाने के बाद भी रंजीत सिन्हा का कहना है कि उन्हें कोई शर्मिंदगी नहीं है.

अख़बार के मुताबिक़ अगर यही आत्मविश्वास है तो उनकी और अधिक 'छीछालेदर' होनी तय है.

अख़बार के मुताबिक़ उनकी सेवानिवृत्ति में सिर्फ 12 दिन बचे हैं और मान सम्मान की रक्षा के लिए अच्छा है कि वो इस्तीफा दे दें.

अख़बार का कहना है कि रंजीत सिन्हा के हटने के बाद सीबीआई में सब कुछ ठीक हो जाएगा, इसकी अपेक्षा नहीं की जा सकती. लेकिन ऐसा कुछ करने की ज़रूरत है जिससे सीबीआई स्वायत्त और जवाबदेह बने.

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