छत्तीसगढ़: महिलाओं को दी गई दवा में ‘ज़हर’

बिलासपुर

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में नसबंदी शिविर के बाद महिलाओं को दी गई सिप्रोसीन-500 दवा में ‘ज़हर’ पाया गया है. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने अलग-अलग सरकारी और ग़ैर सरकारी प्रयोगशालाओं में परीक्षण के बाद आई रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दवा अमानक स्तर की भी है.

स्वास्थ्य मंत्री ने बीबीसी से बातचीत करते हुए इस पूरे मामले में किसी साज़िश की आशंका से इंकार नहीं किया और कहा, “जांच हो जाएगी तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. साज़िश की किसी भी आशंका से हम इंकार करने की स्थिति में नहीं हैं.”

ग़ौरतलब है कि बिलासपुर के पेंडारी में आठ नवंबर को 83 महिलाओं के नसबंदी ऑपरेशन के बाद उनकी तबीयत ख़राब हो गई थी. इसके अलावा बिलासपुर के दूसरे इलाक़ों में भी लोग बीमार पड़ गए थे और 18 लोगों की मौत हो गई थी. इस मामले में सबसे पहले सरकार ने ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक को गिरफ़्तार किया.

12 दवाओं पर प्रतिबंध

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Image caption राहुल गांधी भी परिजनों से मिलने गए

बाद में सिप्रोसीन-500 दवा का निर्माण करने वाली रायपुर की कपंनी महावर फ़ार्मा के ख़िलाफ़ भी मामला दर्ज करते हुए उसके मालिकों को गिरफ़्तार कर लिया गया. साथ ही राज्य सरकार ने 12 दवाओं और अन्य चिकित्सा सामग्रियों पर प्रतिबंध भी लगा दिया था.

राज्य के स्वास्थ्य सचिव आलोक शुक्ला ने स्थानीय प्रयोगशाला में जांच के बाद दवा में ज़िंक फ़ास्फ़ाइट मिलाए जाने की बात कही थी. उसके बाद से ही उच्च स्तर पर दवाओं को परीक्षण के लिए भेजा गया था.

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “रिपोर्ट में जो तथ्य आए हैं, उसके अनुसार दवा में ज़हर भी पाया गया है और वह अमानक स्तर का भी है. जांच रिपोर्ट हमने पुलिस को सौंप दी है.”

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अलग-अलग लैबों में इसकी जांच की गई और अंतिम तौर पर इसे ज़हरीला पाया गया है.

लेकिन जब इस ज़हरीली दवा के लिए स्वास्थ्य मंत्री को ज़िम्मेवार ठहराने उनसे और इस्तीफ़ा देने के बारे में सवाल किया गया तो उनका कहना था, “हमारी पहली प्राथमिकता पीड़ितों को बचाने की थी और हम उसमें सफल रहे. हम चाहते हैं कि इस पूरे मामले में कड़ी से कड़ी जांच और कार्रवाई हो, जिससे ऐसे मामलों के ज़िम्मेदार लोग सबक़ ले सकें.”

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