'कोयला मंत्री से पूछताछ की इजाज़त न थी'

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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले की जांच कर रही विशेष अदालत को बताया कि उसे तत्कालीन कोयला मंत्री (पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह) से पूछताछ की इजाज़त नहीं थी.

कोयला ब्लॉक आवंटन जब किए गए थे उस समय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास ही कोयला मंत्रालय का प्रभार था.

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विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश भरत पराशर ने जांच एजेंसी से पूछा, "क्या आप नहीं समझते कि इस मामले में तत्कालीन कोयला मंत्री से पूछताछ ज़रूरी थी? क्या आप उनसे पूछताछ की ज़रूरत नहीं समझते? क्या आप नहीं मानते कि मामले की हक़ीक़त जानने के लिए उनका बयान ज़रूरी था?"

'बयान आवश्यक नहीं'

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार इन सवालों के जवाब में जांच अधिकारी ने अदालत से कहा कि जांच के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अधिकारियों, पूर्व कोयला सचिव पीसी परख़ और उद्योगपति केएम बिड़ला से पूछताछ की गई और पाया गया कि तत्कालीन कोयला मंत्री का बयान आवश्यक नहीं है.

हालाँकि, जांच अधिकारी ने स्पष्ट किया कि तत्कालीन कोयला मंत्री से पूछताछ की इजाज़त नहीं दी गई थी.

बिड़ला की कंपनी हिंडाल्को को 2005 में ओडिशा में तालाबीरा दो और तीन कोयला ब्लॉक्स आवंटन के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास कोयला मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी था.

जांच अधिकारी ने कहा, "पीएमओ अधिकारियों से पूछताछ की गई. पीएमओ अधिकारियों के बयान की रोशनी में तत्कालीन कोयला मंत्री से पूछताछ नहीं की गई."

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