नेताओं-पत्रकारों की गॉसिप अब ट्विटर पर

इंडिया गेट

सत्ता के गलियारों की अपुष्ट ख़बरों को जानने की चाहत किसे नहीं होती है.

हर कोई जानना चाहता है कि मंत्रालयों, राजनीतिक दलों, नेताओं, पत्रकारों और उनके जीवन में क्या चल रहा है?

शायद इसी चाहत ने दिल्ली के लुटियंस ज़ोन की गॉसिप को लेकर सोशल मीडिया को सक्रिय कर दिया है.

ट्विटर पर कई ऐसे अकाउंट खुल गए हैं जो सत्ता के इन गलियारों की अनौपचारिक ख़बरों को सार्वजनिक कर रहे हैं.

पढ़ें विकास पांडे की रिपोर्ट

दिल्ली के लुटियंस इलाके को भारत में सत्ता का केंद्र माना जाता है.

इस इलाके का डिज़ाइन ब्रितानी आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस ने तैयार किया था. इसी इलाके में भारतीय संसद, राष्ट्रपति भवन और सरकार के तमाम मंत्रालयों की इमारतें मौजूद हैं.

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भारतीय राजनीति पर नज़र रखने वाले देशी विदेशी पत्रकार ख़बर और साक्षात्कार के लिए यहीं पहुंचते हैं. अब सोशल मीडिया पर भी इस इलाके की ख़ूब चर्चा हो रही है.

बिना पुष्टि वाले सोशल मीडिया एकाउंट जैसे लुटियंस स्पाइस, लुटियंस मसाला और लुटियंस इनसाइडर जैसे एकाउंट पर दिल्ली के राजनेताओं, पत्रकारों और उद्योगपतियों के बारे में तमाम गॉसिप मौजूद है.

लुटियंस स्पाइस के बीस हज़ार से ज़्यादा फ़ालोअर हैं. जबकि इस सोशल एकाउंट की प्रतिस्पर्धी एकाउंट लुटियंस मसाला के बारह हज़ार और लुटियंस इनसाइडर के सत्ताइस हज़ार फ़ालोअर हैं.

इन एकाउंट के जरिए राजनेताओं के गुप्त बैठक, कारोबारी समझौते, पत्रकार और उनके राजनीतिक पार्टियों से संबंध और नामचीन लोगों के कथित प्रेम संबंधों के बारे भी ट्वीट किया जाता है.

उनके ट्वीट हज़ारों बार रि-ट्वीट होते हैं.

बिना पुष्टि वाली गॉसिप

वरिष्ठ पत्रकार गिरीश निकम के मुताबिक लुटियंस ज़ोन को कवर करने वाले पत्रकारों के बीच बातचीत में गॉसिप भी हिस्सा रहा है, लेकिन वे सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म पर बिना किसी पुष्टि वाले गॉसिप को ठीक नहीं मानते हैं.

वे कहते हैं, "साथी पत्रकारों के बीच डिनर टेबल पर गॉसिप तो ठीक ,है लेकिन नामालूम ट्विटर खाते पर गॉसिप तो मानहानि और विचलित करने वाला है."

ऐसे सवाल ये है कि कई मशहूर पत्रकार इन खातों को फॉलो क्यों करते हैं?

निकम मानते हैं कि पत्रकारों को गॉसिप पसंद आते हैं, ख़ासकर अपने सहयोगी और राजनेताओं के बारे में.

निकम कहते हैं, "ज़्यादातर पत्रकारों को गॉसिप पसंद है, लेकिन ऐसे ख़ाते ख़तरनाक ट्रेंड हैं. किसी को कलंकित करने वाली सूचना से तो उसका करियर खत्म हो सकता है."

निजता

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न्यूज़लॉन्ड्री डॉटकॉम की संपादक मधु त्रेहन निकम से सहमत हैं.

वो कहती हैं, "भारतीय पत्रकारिता में एक अलिखित नियम है, हम राजनेताओं के निजी जीवन से दूर रहते हैं, लेकिन ये एकाउंट केवल गॉसिप बताते हैं. वे कुछ भी पोस्ट करते रहते हैं."

निकम कहते हैं कि ट्विटर के चलते बिना किसी पुष्टि के ऐसी अफवाहों को पोस्ट करना आसान हो गया है.

लेकिन कुछ लोगों की राय है कि इससे लोगों को कॉमिक राहत मिलती है.

व्यंग्य वाले शो का अभाव

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मधु त्रेहन इस विचार से पूरी तरह असहमत हैं. उनके मुताबिक़, ऐसे सोशल मीडिया एकाउंट पर कोई व्यंग्य नहीं है.

मधु त्रेहान खुद ऑनलाइन माध्यम में व्यंग्य का शो होस्ट करती हैं. उन्होंने बताया, "जब मैंने अपना शो शुरू किया था तो पत्रकार सहज नहीं हुए थे, लेकिन अब उन्हें आदत हो गई, ऐसा इसलिए संभव हो पाया क्योंकि हम एक दूसरे से अपरिचित नहीं थे."

हालांकि उन्होंने साथ में ये भी माना कि उनके शो का व्यंग्य केवल पत्रकारों की ख़बरों पर आधारित होता है.

लेकिन भारतीय टेलीविज़न चैनलों पर ऐसा कोई व्यंग्य का शो नहीं आता.

लोकप्रियता

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गिरीश निकम के मुताबिक राजनेता, मीडिया समूहों के मालिक और पत्रकार अपनी इमेज को लेकर काफी सजग हैं, इसलिए टीवी चैनलों पर व्यंग्य का शो प्रसारित नहीं होता.

लेकिन गिरीश निकम और मधु त्रेहन दोनों मानते हैं कि भारतीय टेलीविज़न पर व्यंग्य शो की कमी को ये सोशल मीडिया के एकाउंट पूरा नहीं करते.

निकम कहते हैं, "ये ट्विटर खाता पत्रकारों में लोकप्रिय है, लेकिन ये अपने आप ग़ायब हो जाएंगे, क्योंकि कोई भी गॉसिप बहुत ज़्यादा दिन तक नहीं चलती."

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