चुपचाप सम्मान मिलने में क्या शान: मनोज

मनोज कुमार, सुमिरन प्रीत कौर

मंगलवार भारतीय मुक्केबाज़ मनोज कुमार के लिए एक राहत भरा दिन था.

खेल मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने उन्हें प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया. लेकिन इसके बावजूद मनोज के मन में एक टीस है.

बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, "पूरी दुनिया के सामने अपने साथी खिलाड़ियों के साथ राष्ट्रपति के हाथों सम्मान मिलता तो कोई बात थी. मुझे तो गुपचुप कमरे के अंदर सम्मान दे दिया गया. इस बात का मुझे बड़ा अफ़सोस है."

Image caption अपने भाई और कोच राजेश कुमार के साथ मनोज कुमार

मनोज को अर्जुन पुरस्कार समिति ने इस सम्मान के लिए नहीं चुना था. समिति के अध्यक्ष पूर्व क्रिकेटर कपिल देव थे.

समिति के फ़ैसले के ख़िलाफ़ मनोज दिल्ली उच्च न्यायालय गए, जहां उनके पक्ष में फ़ैसला हुआ.

सुमिरनप्रीत की विस्तृत रिपोर्ट

मनोज, साल 2010 के राष्ट्रमंडल खेल में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं.

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इसके अलावा वो दो बार के एशियाई मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप कांस्य पदक विजेता भी हैं.

वो कहते हैं, "चुपचाप सम्मान मिलने में कोई शान नहीं लेकिन हक़ के लिए लड़ना ज़रूरी है. चयन समिति ने मुझ पर ध्यान ना देकर जिन खिलाड़ियों को चुना उनका प्रदर्शन मुझसे अच्छा कतई नहीं था."

मनोज, अपनी जीत का श्रेय अपने बड़े भाई और कोच राजेश कुमार को देते हैं.

मनोज बताते हैं कि अर्जुन पुरस्कार जब उन्हें नहीं मिला था तो उनका मनोबल टूट गया और इसका असर इंचियोन एशियाई खेल में उनके प्रदर्शन पर भी पड़ा.

'ओलंपिक में जीतूंगा'

लेकिन अब मनोज कुमार अपने भाई की सलाह को गांठ बांधकर आगे की सोच रहे हैं.

वो कहते हैं, "खिलाड़ी सम्मान के लिए ही तो खेलता है. अब अर्जुन पुरस्कार तो मुझे मिल गया. मेरा अगला लक्ष्य है रियो ओलंपिक. मैं वहां मेडल जीतकर लाऊंगा."

मनोज के कोच राजेश कुमार कहते हैं, "हमें सिस्टम से लड़ाई लड़नी पड़ी इस बात का दुख है लेकिन इतनी मेहनत के बाद भी हक़ ना मिला तो ऐसा करना पड़ा."

'सरिता पर प्रतिबंध ठीक नहीं'

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मनोज कुमार, महिला मुक्केबाज़ सरिता देवी से सहानुभूति रखते हैं.

उन पर फ़िलहाल इंचियोन एशियाई खेलों में अपना कांस्य पदक वापस करने के लिए अस्थाई प्रतिबंध लगा हुआ है.

मनोज मानते हैं कि जब सरिता ने माफ़ी भी मांग ली तो उनके खिलाफ़ इतना कड़ा रुख ठीक नहीं.

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