चीन पर दवा निर्भरता 'सुरक्षा' का मुद्दा

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अमरीका में जेनेरिक दवाओं की 40 प्रतिशत आपूर्ति करने वाले भारत की चीन पर निर्भरता को लेकर भारत सरकार में गहरी चिंता है.

इस स्थिति को 'सुरक्षा' के मुद्दे के तौर पर देखा जा रहा है.

भारतीय दवा कंपनियों की कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भरता को लेकर कुछ दिन पहले लोकसभा में सवाल-जवाब भी हुए.

ख़बरों के मुताबिक़ भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र में संभावित संकट की स्थिति पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने भी सरकार को अगाह किया है.

पढ़ें फ़ैसल मोहम्मद अली की पूरी रिपोर्ट

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Image caption ओबामाकेयर के लागू होने से भारत की दवा कंपनियों को फ़ायदा होगा.

प्रधानमंत्री कार्यालय में बैठकें हुईं और एक टास्क फोर्स भी बनी, जिसे तीन माह में रिपोर्ट देने को कहा गया है.

टास्क फ़ोर्स को देखना है कि मौजूदा स्थिति में कैसे बदलाव लाया जा सकता है और क्या किया जाना चाहिए.

भारतीय कंपनियां आवश्यक दवा निर्माण के लिए लगभग 80-90 प्रतिशत कच्चा माल चीन से आयात करती हैं.

चिंता जताई गई है कि सीमा पर तनाव बढ़ने या सैन्य तनाव की स्थिति में चीन कच्चे माल की सप्लाई रोक सकता है, जिससे भारत में ज़रूरी औषधियों की क़िल्लत हो जाएगी.

भारत-चीन के बीच सीमा को लेकर तनाव रहा है और 1962 में दोनों के बीच युद्ध भी हो चुका है.

संसद में सवाल

सांसद संजय जायसवाल के मुताबिक़, "यह बहुत ख़तरनाक स्थिति है."

पेशे से चिकित्सक जायसवाल कहते हैं, "जो देश 50 से अधिक मुल्कों को दवा सप्लाई करता हो, उसके आधे से अधिक दवा निर्माता अपने कच्चे माले के लिए किसी अन्य देश पर निर्भर हों, इससे ख़तरनाक स्थिति कोई नहीं हो सकती."

रसायन और उर्वरक मंत्री अनंत कुमार ने कहा है कि आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल 12 दवाएं ऐसी हैं जिन्हें तैयार करने के लिए ज़रूरी 80 से 90 प्रतिशत कच्चा माल चीन से आता है.

व्यापार पर चोट

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दवा निर्माताओं के संगठन इंडियन ड्रग मैन्युफ़ैक्चरर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनंत ठाकोर का कहना है कि चीन पर अधिक निर्भरता भारत के दवा निर्यात को भी नुक़सान पहुंचा सकती है.

विश्व की 10 प्रतिशत दवा इस समय भारत में बनती हैं और विश्व निर्यात में उसका हिस्सा 1400 करोड़ डॉलर से भी अधिक है.

अमरीका को 40 प्रतिशत जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति भारत से होती है और राष्ट्रपति बराक ओबामा की स्वास्थ्य योजना के मद्देनज़र इसके और बढ़ने की उम्मीद है.

सवाल रोज़गार का

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अनंत ठाकोर ने भारतीय दवा क्षेत्र के लिए एक श्वेत पत्र तैयार किया है.

उनका कहना है कि चीन अपनी कंपनियों को नौ से 13 प्रतिशत सब्सिडी देता है. इस वजह से वहां से आने वाला कच्चा माल भारतीय कच्चे माल से 15-20 प्रतिशत सस्ता होता है.

संजय जायसवाल के मुताबिक़ स्थिति में बदलाव इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि स्थानीय तौर पर कच्चा माल तैयार होने से लाखों भारतीयों के लिए रोज़गार के अवसर भी खुलेंगे.

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