जम्मू: मोदी के दौरे से पहले हमले के मायने

जम्मू के अरनिया में चरमपंथी हमले के दौरान मोर्चा संभाले जवान इमेज कॉपीरइट AFP

जम्मू इलाक़े में गुरुवार को हुए चरमपंथी हमले ने भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर में हो रहे विधानसभा चुनाव के लिए किए गए सुरक्षा इंतज़ाम के दावों की पोल खोल दी है.

जम्मू क्षेत्र में पाकिस्तान के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट अरनिया में गुरवार को हुए चरमपंथी हमले में 11 लोग मरे गए थे.

मरने वालों में चार चरमपंथी, चार आम नागरिक और तीन सुरक्षाकर्मी थे.

बीनू जोशी की रिपोर्ट

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विधानसभाचुनाव के बीच ऐसी घटना सुरक्षा एजेंसियों की एक बड़ी चूक मानी जा रही है.

अहम बात यह है कि यह घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज्य में शुक्रवार को दूसरे चुनावी दौरे से पहले हुई है.

प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार को जम्मू के उधमपुर और पूँछ में चुनावी रैलियां करने आ रहे हैं.

प्रधानमंत्री ने 22 नवंबर को किश्तवाड़ में अपनी पहली चुनावी रैली में पाकिस्तान की बात करने से मना कर दिया था, क्योंकि लोग विकास, शिक्षा, रोज़गार और व्यापार की बात सुनना चाहते हैं.

राजनीतिक विशेषज्ञ रेखा चौधरी कहती हैं, "आज नरेंद्र मोदी को पाकिस्तान और चरमपंथी हिंसा पर तो बोलना ही पड़ेगा."

हमले का समय

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Image caption प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को जम्मू के उधमपुर और पूँछ में चुनावी रैलियों को संबोधित करने वाले हैं.

गुरुवार का चरमपंथी हमला तब हुआ जब दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) का 18वां सम्मेलन नेपाल में सम्पन होने जा रहा था.

सम्मेलन में क्षेत्र में शांति, व्यापार, और विकास के लिए आपसी तालमेल और सहयोग की बात हो रही थी. काफी अनिश्तिता के बाद भारतीय और पाकिस्तानी प्रधानमंत्रियों ने हाथ मिलाया था.

भारतीय सेना के प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने 25 नवंबर को जम्मू कश्मीर का दौरा किया था.

उन्होंने कहा था कि सीमाओं पर चुनाव के दौरान हाई अलर्ट रहेगा. पाकिस्तान की चरमपंथियों की घुसपैठ को सफल नहीं होने दिया जाएगा.

जम्मू में पुलिस उपमहानरीक्षक शकील बेग का मानना है, "हो सकता है कि इस घटना में शामिल चरमपंथियों ने हाल ही में पाकिस्तान की तरफ से घुसपैठ की हो.''

लेकिन सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का कहना है कि ये चरमपंथी पहले से भारतीय क्षेत्र में थे.

हमले की साज़िश

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राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का मानना है," यह (चरमपंथी हमला) इत्तेफाक नहीं बल्कि एक साज़िश है, वह भी तब जब भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री सार्क सम्मलेन में हिस्सा ले रहे थे."

राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक मनमोहन खजुरिया कहते हैं, "एक सोची समझी चाल के तहत पाकिस्तान के इशारों पर चरमपंथी अंतरराष्ट्रीय सीमा से घुसपैठ कर हमला करते हैं."

इस साल 28 मार्च को भी तीन चरमपंथियों ने जम्मू-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक प्राइवेट गाड़ी को रोक कर यात्रियों पर गोलियां बरसाईं और बाद में एक सैनिक शिविर पर हमले की कोशिश की.

इस हमले में तीनों चरमपंथियों समेत चार अन्य लोग मारे गए थे और तीन घायल हुए थे.

उससे पहले पिछले साल 26 सितंबर को सीमा पार पाकिस्तान से घुसपैठ कर आए तीन चरमपंथियों ने पहले पुलिस स्टेशन और फिर सैनिक छावनी पर हमला कर के आठ लोगों को मार डाला था.

इसमें चार पुलिसकर्मी,एक सैन्य अधिकारी और दो आम नागरिक शामिल थे. बाद में चरमपंथी भी मारे गए थे.

संघर्ष विराम का उल्लंघन

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल जुलाई से अब तक अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम के उल्लंघन की 400 से अधिक घटनाएं हुईं.

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भारत का आरोप है कि पाकिस्तान भारतीय इलाक़े पर अकारण गोलीबारी करता है.

इस दौरान जान-माल का काफी नुक़सान हुआ. सीमा पर स्थित कई गांवों के लोगों को पलायन करना पड़ा.

धीरे-धीरे सीमा पर गोलीबारी का सिलसिला थम गया. भारतीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अब पाकिस्तान सोच समझ कर ही गोलीबारी करेगा. हालांकि गोलीबारी बिल्कुल तो नहीं थमी लेकिन उसमें काफी कमी आई.

गुरुवार के चरमपंथी हमले के बाद न केवल सीमा बल्कि भीतरी इलाकों में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

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