छत्तीसगढ़ के सात बड़े माओवादी हमले

नक्सल, माओवादी, शिविर

छत्तीसगढ़ के बस्तर ज़िले में सोमवार को सीआरपीएफ़ के दल पर हमला कर माओवादियों ने 14 जवानों की हत्या कर दी है.

लेकिन यह पहला बड़ा हमला नहीं है. घात लगाकर हमला करना माओवादियों की ख़ासियत रही है और वह इससे पहले बड़े हत्याकांडों को अंजाम दे चुके हैं.

एक नज़र छत्तीसगढ़ में माओवादियों के किए सात बड़े हमलों पर.

दरभा: 25 मई 2013

बस्तर के दरभा घाटी में हुए इस माओवादी हमले में आदिवासी नेता महेंद्र कर्मा, कांग्रेस पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष नंद कुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 30 से अधिक लोग मारे गए थे.

धोड़ाई: 29 जून 2010

नारायणपुर जिले के धोड़ाई में सीआरपीएफ के जवानों पर माओवादियों ने हमला किया. इस हमले में पुलिस के 27 जवान मारे गए.

दंतेवाड़ा: 17 मई 2010

एक यात्री बस में सवार हो कर दंतेवाड़ा से सुकमा जा रहे सुरक्षाबल के जवानों पर माओवादियों ने बारूदी सुरंग लगा कर हमला किया था, जिसमें 12 विशेष पुलिस अधिकारी समेत 36 लोग मारे गए थे.

ताड़मेटला: 6 अप्रैल 2010

बस्तर के ताड़मेटला में सीआरपीएफ के जवान सर्चिंग के लिए निकले थे, जहां संदिग्ध माओवादियों ने बारुदी सुरंग लगा कर 76 जवानों को मार डाला था.

मदनवाड़ा: 12 जुलाई 2009

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राजनांदगांव के मानपुर इलाके में माओवादियों के हमले की सूचना पा कर पहुंचे पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार चौबे समेत 29 पुलिसकर्मियों पर माओवादियों ने हमला बोला और उनकी हत्या कर दी.

उरपलमेटा: 9 जुलाई 2007

एर्राबोर के उरपलमेटा में सीआरपीएफ और ज़िला पुलिस का बल माओवादियों की तलाश कर के वापस बेस कैंप लौट रहा था. इस दल पर माओवादियों ने हमला बोला जिसमें 23 पुलिसकर्मी मारे गए.

रानीबोदली: 15 मार्च 2007

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बीजापुर के रानीबोदली में पुलिस के एक कैंप पर आधी रात को माओवादियों ने हमला किया और भारी गोलीबारी की. इसके बाद कैंप को बाहर से आग लगा दिया. इस हमले में पुलिस के 55 जवान मारे गए.

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