5 लाख की मदद लेकिन 8 साल का इंतज़ार

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राजस्थान सरकार ने अनुसूचित जाति के युवक-युवतियों को सवर्ण जाति में विवाह करने पर दी जाने वाली राशि के नियमों में संशोधन किया है.

नए नियम एक दिसंबर से प्रभावी हो रहे हैं.

इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार ने 2013 में छुआछूत उन्मूलन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ऐसे विवाहों के लिए दी जाने वाली राशि को 50,000 रुपये से बढ़ाकर एकमुश्त पांच लाख कर दिया था.

अब ढाई लाख रुपये की राशि पति-पत्नी के संयुक्त नाम से सरकारी बैंक में आठ साल के लिए फिक्स डिपॉजिट की जाएगी और शेष ढाई लाख रुपये पति-पत्नी के संयुक्त बैंक खाते में जमा किए जाएंगे.

'जातिवादी रंग'

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मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सरकार ने कथित रूप से फर्जी विवाहों के मामले में इस राशि के बेज़ा इस्तेमाल को रोकने के उद्देश्य से यह संशोधन किया है.

पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज की कविता श्रीवास्तव ने कहा, "इस निर्णय में सरकार का 'जातिवादी रंग' झलकता है. संभवतः सरकार यह भी नहीं चाहती कि लड़कियों को अपने पसंद के विवाह का विकल्प मिले."

इस कदम की भर्त्सना करते हुए उन्होंने इस राशि की बहाली की मांग की है.

स्वयं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है कि वर्तमान सरकार उनकी सभी अच्छी योजनाओं को और सशक्त बनाने के बजाय कमज़ोर कर रही है.

दलित अधिकार

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उन्होंने बीबीसी को बताया, "आठ वर्ष बाद इस राशि की कीमत कम हो जाएगी और विवाहित जोड़े अपना कुछ काम, उद्योग धंधा शुरू करने से वंचित हो जायेंगे."

गहलोत कहते हैं, "यदि सरकार के सामने इस योजना की कोई बहुत ही बड़ी अनियमताओं अथवा फर्जीवाड़े की शिकायतें सामने आई है तो उससे संबंधित तथ्य सरकार को प्रस्तुत करने चाहिए."

दलित अधिकारों के लिए संघर्ष करने वालों की राय में यह अंतर्जातीय विवाह को हतोत्साहित करने वाला कदम है.

सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी को डर है कि यह 'लव जिहाद' का मुद्दा बनाने जैसा कदम हो सकता है.

अंतर्जातीय विवाह

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उन्होंने बीबीसी को बताया, "अमूमन अंतर्जातीय विवाहों के बाद दंपत्ति को विपरीत परिस्थितयों में रहना पड़ता है, घर- परिवार से भागना पड़ता है. कई बार पुलिस भी उन पर दबाव डालती है."

भंवर मेघवंशी कहते हैं, "यदि उन्हें 'एकमुश्त' राशि मिलेगी तो नया घर बसाने में सुरक्षा रहेगी. यदि कोई फर्जी मामला पेश आए तो कानूनी कार्यवाही तो की ही जा सकती है."

सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार इस योजना में साल 2011-2012 में 130 जोड़ो को 65 लाख और साल 2012-2013 में 175 जोड़ों को 87.50 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि दी गई.

राज्य सरकार ने साल 2013-14 में अंतर्जातीय शादी करने वाले 261 जोड़ों को 726 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं.

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