...तो शाहजहाँ भी इमाम बन जाते: ओवैसी

असदउद्दीन ओवैसी, सांसद, हैदराबाद

हैदराबाद के सांसद असदउद्दीन ओवैसी ने बीबीसी गूगल हैंगआउट में दिल्ली की जामा मस्जिद के इमाम को वक्फ बोर्ड का कर्मचारी बताते हुए चुटकी ली है.

ओवैसी ने कहा, "अगर शाहजहाँ को पता होता कि मुग़लिया दौर ख़त्म हो जाएगा लेकिन शाही इमाम की ख़ानदानी इमामत हमेशा चलती रहेगी, तो वह शायद इमाम ही बन जाते."

उन्होंने यह भी कहा, "इमाम अहमद बुखारी वक्फ बोर्ड के केवल एक मुलाज़िम हैं."

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दिल्ली की जामा मस्जिद मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने बनवाई थी. उन्होंने मस्जिद के पहले इमाम को मध्य एशिया के बुखारा शहर से बुलाया था.

कुछ दिन पहले जामा मस्जिद के इमाम अहमद बुखारी के 19 वर्षीय बेटे को नायब इमाम बनाए जाने पर विवाद खड़ा हो गया था.

'आनवंशिक नहीं है इमामत'

आल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन(एमआईएम) के अध्यक्ष असदउद्दीन ओवैसी ने कहा कि दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद की इमामत आनुवांशिक नहीं है और जामा मस्जिद के इमाम केवल वक्फ बोर्ड के एक मुलाज़िम हैं.

दिल्ली वक्फ बोर्ड ने इस बात पर आपत्ति जताई थी कि अहमद बुखारी को नायब इमाम नियुक्त करने का कोई अधिकार नहीं है.

बीबीसी स्टूडियो में बातें करते हुए असदउद्दीन ओवैसी ने कहा कि इस्लाम में इस तरह की विरासत के लिए कोई जगह नहीं.

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उन्होंने कहा, "जामा मस्जिद वक़्फ़ की प्रापर्टी है, और इमाम उसके मुलाज़िम हैं."

पहले इमाम के वारिस

शाहजहाँ के समय पहले इमाम की नियुक्ति पूरे धूम-धाम से हुई थी. और उसी पहले इमाम के वारिस अहमद बुखारी हैं.

अहमद बुखारी की नियुक्ति के समय भी इस पर विवाद हुआ था लेकिन उनके पिता इमाम अब्दुल्लाह बुखारी ने उस समय वक्फ बोर्ड की आपत्ति को खारिज कर दिया था.

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दिल्ली की जामा मस्जिद के इमाम हमेशा सियासत से क़रीब रहे हैं और चुनाव के समय मुसलमानो को ये भी सलाह देते आए हैं कि वो किस पार्टी को वोट दें.

ओवैसी ने कहा खुद अहमद बुखारी ने 2004 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और अटल बिहारी वाजपेयी की हिमायत की थी. ओवैसी का कहना था कि जामा मस्जिद के इमाम भारत के मुसलमानों के नेता नहीं हो सकते.

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