बाबरी केस: हाशिम के बेटे करेंगे पैरवी

6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद गिराए जाने के 22 साल पूरे हो गए. अयोध्या में इसे लेकर कोई उत्तेजना नहीं है.

वहां चर्चा है तो सिर्फ़ इस मुक़दमे के सबसे पुराने मुद्दई हाशिम अंसारी के उस फ़ैसले की, जिसमें उन्होंने अपने लड़के इक़बाल को मुक़दमे की पैरवी सौंप दी है.

साथ ही अंसारी के उस बयान से भी सियासत में हलचल है, जिसमें उन्होंने महंत ज्ञानदास के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर इसका हल निकालने की बात की है.

93 साल के हाशिम अंसारी ने आज़म खान के एक बयान से कथित रूप से नाराज़ होकर मुक़दमे की पैरोकारी करने से यह कहकर मना कर दिया था कि इस पर बहुत ज़्यादा राजनीति हो रही है.

इक़बाल अंसारी ने बीबीसी से पुष्टि की कि वह अपने पिता की जगह बाबरी मस्जिद मुक़दमे की पैरोकारी करेंगे.

मोदी से मुलाक़ात

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इक़बाल ने कहा कि इसकी वजह उनके पिता की आज़म से नाराज़गी नहीं, बल्कि उनका स्वास्थ्य है.

"उनके दाहिने पैर के कूल्हे की हड्डी में फ्रैक्चर है, जिससे उनका चलना-फिरना संभव नहीं है. उन्हें सुनाई भी कम देता है. पूरी बात ठीक से समझ भी नहीं पाते हैं."

इक़बाल ने ख़ुद को समाजवादी पार्टी का कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि उनको प्रदेश सरकार से कोई शिकायत नहीं है.

इक़बाल ने माना कि महंत ज्ञानदास के साथ अयोध्या मसले का हल निकालने के लिए हाशिम अभी भी कोशिश कर रहे हैं.

"वो चाहते हैं कि मामला अदालत के बाहर सुलझ जाए. इसके लिए प्रधानमंत्री से दोनों मिलेंगे, लेकिन कब और कैसे यह अभी तय नहीं है."

एक तरफ तो बाबरी मस्जिद की ज़मीन का मसला देश के उच्चतम न्यायलय में विचाराधीन है, दूसरी तरफ़ इससे जुड़े आपराधिक मुक़दमे हैं जिनमें करीब 250 पेशियां पड़ चुकी हैं और 50 लोगों की गवाही हो चुकी है.

इसमें भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण अडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती सहित अन्य लोगों पर अयोध्या के रामजन्मभूमि थाने में मुक़दमा लिखाया गया था. इसका भी जल्दी फ़ैसला आने की संभावना नहीं दिखाई देती.

हाशिम अंसारी इस "लम्बी मुक़दमेबाजी से थक गए हैं."

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