स्वामी को कौन सा मंत्रालय चाहिए?

सुब्रमण्यम स्वामी

डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी कहते हैं उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मंत्रिमंडल में शामिल करना चाहें तो वो ज़रूर इस ज़िम्मेदारी को स्वीकार करेंगे, हालांकि उनकी शर्त है कि मंत्रालय उनकी पसंद और उनकी क्षमता के अनुसार होना चाहिए.

ऐसे में वे कौन से मंत्रालय हैं, जिनकी जिम्मेदारी स्वामी संभालने को इच्छुक हैं, पूछे जाने पर वे इत्मीनान से कहते हैं, "चार मंत्रालयों में से एक मिलेगा तो वो इसे स्वीकार कर सकते हैं और वो हैं वित्त मंत्रालय, गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय."

उन्होंने आगे कहा, "अगर मुझे कहेंगे कि ग्रामीण विकास मंत्रालय देखो तो मुझे तो गाँव के बारे में कुछ आता ही नहीं है. मैं तो शहर का आदमी हूँ"

मांग नहीं की

डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी पिछले साल अपनी जनता पार्टी के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे.

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Image caption सरकार बनने के बाद भी सुब्रमण्यम स्वामी को मोदी ने मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया है.

हालांकि मई में हुए चुनाव के बाद मंत्रिमंडल के गठन और हाल में हुए इसके विस्तार के बाद भी उन्हें अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी टीम में शामिल नहीं किया है.

स्वामी का कहना है कि न तो उन्होंने मंत्रिमंडल में शामिल होने की मांग की और न ही इसके लिए कोई दबाव डाला.

स्वामी भारत के अनुभवी नेताओं में से एक हैं. उन्होंने अमरीका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पीएचडी की है और वहीं दस साल तक पढ़ा भी चुके हैं. वो योजना आयोग के सदस्य भी रह चुके हैं.

अक्सर विवादों में घिरे रहने वाले डॉ. स्वामी पांच बार संसद के लिए चुने भी गए हैं और दो बार मंत्री भी रह चुके हैं.

'मुझे कोई रोक नहीं सकता'

बीबीसी से एक ख़ास मुलाक़ात में जब उनसे पूछा गया कि नरेंद्र मोदी ने उन्हें अब तक मंत्रिमंडल शामिल क्यों नहीं किया है तो उनका कहना था, "वो तो आप मोदी से ही पूछें."

उन्होंने कहा कि उनकी जनता पार्टी को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गांधीवादी और समाजवादी का नाम दिया तो अपनी पार्टी में बने रहे. इसके बाद आरएएसएस के कहने पर वो भाजपा में शामिल हो गए

उन्होंने कहा, "मुझे इतना आत्मविश्वास है कि जब मुझे मंत्री बनना होगा, तो कोई रोक नहीं सकता."

मोदी के बारे में उन्होंने कहा कि वो 1972 से उन्हें जानते हैं और आपातकाल की अवधि के दौरान उन्होंने साथ काम किया था.

वो कहते हैं, "नरेंद्र मोदी बहुत घनिष्ठ मित्र हैं और अगर वो हमें मंत्री नहीं बना सकते तो उनकी कोई मजबूरी होगी."

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