'सरकार के पास जमा पासपोर्ट खो गया'

विक्टर यूसे, नाइजीरिया, छत्तीसगढ़ की जेल इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption बिलासपुर के थाने में विक्टर यूसे (फ़ोटो: आलोक पुतुल)

छत्तीसगढ़ की बिलासपुर सेंट्रल जेल में बंद नाइजीरिया के 34 साल के विक्टर यूसे को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार परेशान है.

लॉटरी के नाम पर ठगी के आरोप में विक्टर को 26 जून 2012 को बिलासपुर की एक अदालत ने ढाई साल की सज़ा सुनाई थी.

लेकिन इस महीने की 15 तारीख़ को सज़ा पूरी होने के बाद भी विक्टर को छोड़ा नहीं जा सका है क्योंकि सरकार के पास जमा विक्टर का वीज़ा और पासपोर्ट गुम गया है.

विक्टर पिछले छह दिनों से बिना किसी कारण जेल में बंद हैं.

सौंपा जाना है दूतावास को

जेल अधीक्षक एसएस तिग्गा के अनुसार, "नियमानुसार रिहाई के बाद विक्टर को उसके देश के दूतावास को सौंपा जाना था. इसके लिए जब पुलिस को पत्र लिखा गया, तब पता चला कि विक्टर का वीज़ा और पासपोर्ट थाने में है ही नहीं. हमें पुलिस ने गार्ड भी उपलब्ध नहीं कराया."

अधिकारियों का कहना है कि बिना वीज़ा-पासपोर्ट के देश में कोई विदेशी नागरिक स्वतंत्र नहीं घूम सकता, इसलिये विक्टर को रिहा करने का काम टल गया.

अब बिलासपुर की पुलिस और प्रशासन के अधिकारी सरकारी फ़ाइलों को खंगाल रहे हैं. अदालत की फ़ाइलें भी देखी जा रही हैं.

इस मामले में हस्तक्षेप करने वाले राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव रजनीश श्रीवास्तव कहते हैं, "उसे पुलिस संरक्षण में सीधे दिल्ली स्थित नाइजीरिया के दूतावास में भेजा जा सकता है और हमने ज़िला प्रशासन को इस दिशा में कार्रवाई के लिए कहा है."

घर पहुंचना है

अपनी रिहाई के बाद भी ज़ेल में बंद विक्टर का कहना है कि उसे जल्दी छोड़ा जाना चाहिए.

ढाई साल पहले जब विक्टर जेल पहुंचे तो उन्हें ठीक-ठीक अंग्रेज़ी भी नहीं आती थी.

जेल में भी उन्हें शाकाहारी खाना और ख़ासतौर पर दाल-चावल नहीं भाता था.

अब विक्टर को दाल-चावल खाना भी भाने लगा है और हिंदी भी. वे कहते हैं, "मुझे छोड़ जाना चाहिए. मैं जल्दी से जल्दी अपने घर पहुंचना चाहता हूं."

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