कितना कारगर रहा शीतकालीन सत्र?

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मंगलवार यानी 23 दिसंबर संसद के शीतकालीन सत्र का अंतिम दिन था और बैठक शुरू होने के कुछ देर बाद ही लोकसभा अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गई.

इस सत्र में संसद ने कुल 10 विधेयक पास किए.

आठ विधेयक लोकसभा में पास हुए, पर राज्यसभा से पास नहीं हो सके.

बीमा क़ानून संशोधन विधेयक (2008) और कोयला खदान संशोधन विधेयक (2014) जैसे महत्वपूर्ण विधेयक राज्यसभा से पास नहीं हो पाए.

उत्पादकता के लिहाज से देखें तो लोकसभा और राज्यसभा में अपेक्षाकृत कामकाज की स्थिति बेहतर रही.

उत्पादकता

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शीतकालीन सत्र में लोकसभा की बैठक निर्धारित समय से अधिक चली, जबकि राज्यसभा हंगामे की वजह से लगातार स्थगन का शिकार रही.

उत्पादकता के लिहाज से लोकसभा ने तय समय का 102 प्रतिशत और राज्यसभा ने 61 प्रतिशत इस्तेमाल किया.

इस सत्र में लोकसभा की बैठक 129 घंटे और राज्यसभा की बैठक 75 घंटे चली.

क़ानून

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संसद ने जो 10 विधेयक पास किए उनमें से तीन इसी सत्र में पेश किए गए थे.

सत्र में कुल 16 विधेयक पेश किए गए- लोकसभा में 15 और राज्यसभा में एक.

लोकसभा में पेश 15 विधेयकों में से दो को स्टैंडिंग कमेटी को गौर करने को भेजा गया.

हालांकि, कोयला खदान, कंपनी, भुगतान व समझौता और मोटर व्हीकल्स विधेयकों पर चर्चा के दौरान सांसदों की ओर से इन्हें स्टैंडिंग कमेटी को भेजने की अपील की गई, लेकिन स्टैंडिंग कमेटी को भेजे बिना इन्हें पास कर दिया गया.

प्रश्नकाल

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राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान बार-बार बाधा के कारण बैठक तय समय सीमा का 27 प्रतिशत ही चल पाई.

कामकाज बेहतर बनाने के लिए ऊपरी सदन में प्रश्नकाल को सुबह 11 बजे से आगे कर 12 बजे कर दिया गया पर यह तरक़ीब भी काम नहीं आई.

हालांकि लोकसभा में प्रश्नकाल के तयशुदा समय का 84 प्रतिशत इस्तेमाल हुआ. इसमें प्रश्नों के मौखिक जवाब भी 2004 से अब तक सर्वाधिक रहे.

लोकसभा में मंत्रियों ने 98 सवालों के जवाब दिए जबकि राज्यसभा में 44 सवालों के जवाब दिए गए.

महत्वपूर्ण बहस

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इस सत्र में काला धन, धर्म परिवर्तन, प्राकृतिक आपदा और मनरेगा को सीमित करने पर लोकसभा में बहस हुई.

जबकि राज्यसभा में कृषि संकट, काला धन, कैब ड्राइवर द्वारा महिला के बलात्कार और डब्ल्यूटीओ में सरकार के पक्ष पर चर्चा हुई.

प्रदर्शन

इस सत्र में सरकार की योजना 18 विधेयक पास करने की थी, जिनमें 10 ही पास कराए जा सके.

सरकार 17 में 16 विधेयक ही पेश कर सकी. सत्र के दौरान सरकार की योजना पांच विधेयकों को वापस लेने की थी.

पास हुए विधेयक

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1- अप्रेंटिसेज़ संशोधन विधेयक, 2014

2. श्रम क़ानून (रिटर्न भरने व हाजिरी रजिस्टर रखने से छूट) संशोधन विधेयक, 2011

3-दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टेब्लिशमेंट संशोधन विधेयक, 2014

4-आईआईआईटी विधेयक, 2014

5-केंद्रीय विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2014

6-संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश संशोधन विधेयक, 2014

7-टेक्सटाइल अंटरडेकिंग्स (राष्ट्रीयकरण) क़ानून संशोधन विधेयक, 2014

8-मर्चेंट शिपिंग संशोधन विधेयक, 2013

9-मर्चेंट शिपिंग दूसरा संशोधन विधेयक, 2013

10-स्कूल ऑफ़ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर विधेयक, 2014

लंबित विधेयक

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इनके अलावा लोकसभा में लोकपाल और लोकायुक्त संशोधन विधेयक, बिजली संशोधन विधेयक, जीएसटी (संविधान में 122वां संशोधन) विधेयक, नागरिकता संशोधन विधेयक पेश हुए पर पास नहीं हो पाए.

उच्च शिक्षा एवं शोध विधेयक (2011), कोयला खदान (राष्ट्रीयकरण) संशोधन विधेयक (2000), खाद्य सुरक्षा एवं मानक संशोधन विधेयक और एंटी हाइजैकिंग संशोधन (2010) समेत छह विधेयक राज्यसभा से वापस लिए गए.

(पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च की विज्ञप्ति के अनुसार 22 दिसंबर तक संसद के कामकाज पर आधारित)

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