'वाजपेयी तो ठीक, मालवीय क्यों?'

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा पर सोशल मीडिया में काफ़ी लोगों ने अपनी राय व्यक्त की है.

इनमें से ज़्यादातर जहाँ वाजपेयी को ये सम्मान दिए जाने पर ख़ुशी व्यक्त कर रहे हैं वहीं महामना मालवीय को भारत रत्न पर कुछ ने सवाल उठाए हैं.

जाने-माने लेखक रामचंद्र गुहा ने ट्वीट किया, "वाजपेयी को भारत रत्न देना तो ठीक है मगर जिन लोगों की मौत हो चुकी है वो भी काफ़ी पहले, उन्हें ये सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए. मालवीय को ये सम्मान देना एक ग़लती है."

इतना ही नहीं इसके बाद गुहा ने लिखा, "अगर मालवीय तो फिर टैगोर, फूले, तिलक, गोखले, विवेकानंद, अकबर, शिवाजी, गुरु नानक, कबीर, अशोक भी भारत रत्न हैं?"

सुधींद्र कुलकर्णी ने भी मालवीय को भारत रत्न दिए जाने पर आपत्ति जताई. उन्होंने लिखा, "स्वतंत्रता आंदोलन के समय के नेताओं को मरणोपरांत भारत रत्न देने की परंपरा ग़लत है. ये मदन मोहन मालवीय के साथ ही रुक जाना चाहिए."

नेहरू और इंदिरा का भारत रत्न

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वैसे द रोग काउब्वॉय नाम से एक ट्वीट में कहा गया है कि दिवंगत मालवीय को भारत रत्न दिए जाने की आलोचना करने वालों को क्या ये पता है कि जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गाँधी ने ख़ुद को ये सम्मान दिया था.

फ़िल्मकार मधुर भंडारकर ने दोनों को भारत रत्न के फ़ैसले की तारीफ़ की. भंडारकर ने लिखा, "दो बड़े नेता और मिट्टी के सपूत अटल जी और मालवीय जी, जिन्होंने भारत को गौरवशाली बनाने के लिए मेहनत की, उन्हें भारत रत्न दिया गया है. बहुत बधाई."

कई लोगों ने इस बारे में चटखारे लेकर भी ट्वीट किए हैं. संता भाउ नाम से किए गए ट्वीट में लिखा है, "भाजपा के सत्ता में आने के लिए राहुल गाँधी के सबसे अहम व्यक्ति होने के नाते, उन्हें भी भारत रत्न देने पर विचार होना चाहिए था."

कुछ और नाम

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Image caption तेंदुलकर को भारत रत्न मिलने के बाद से ही मेजर ध्यानचंद के लिए भी इस सम्मान की माँग होने लगी है

सिद्धार्थ छाया ने लिखा है, "कांग्रेस को आधिकारिक रूप से फ़ेसबुक और ट्विटर को धन्यवाद देना चाहिए कि जब नेहरू जी और इंदिरा जी ने ख़ुद को भारत रत्न दिया था तो फ़ेसबुक और ट्विटर दुनिया में नहीं आए थे."

वहीं स्वामी ब्रह्मचित्त के ट्वीट के अनुसार, "राष्ट्रपति वीवी गिरि ने इंदिरा गांधी को 1971 में भारत रत्न दिए जाने की सिफ़ारिश की, जबकि इंदिरा गांधी ने 1975 में वीवी गिरि को भारत रत्न दिया."

अजित प्रताप ने इस मौक़े पर कुछ अहम नामों का ज़िक्र किया है जिन्हें उनके हिसाब से भारत रत्न दिया जाना चाहिए था.

उनके अनुसार, "वर्गीज़ कुरियन, आर के नारायणन, आर के लक्ष्मण, ध्यानचंद और शायद नरसिंह राव" को ये सम्मान पहले ही दे दिया जाना चाहिए था.

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