जम्मू कश्मीरः भाजपा-पीडीपी आदर्श विकल्प?

नरेंद्र मोदी और महबूबा मुफ्ती

जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में खंडित जनादेश के बीच इस बात पर उलझन बढ़ती जा रही है कि प्रदेश में सरकार किसकी बनेगी.

चुनाव नतीजों को देखें तो सरकार बनने के तीन संभावित विकल्प दिखाई दे रहे हैं.

पीडीपी को सबसे ज़्यादा 28 और कांग्रेस को 12 सीटें मिली हैं.

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पहला विकल्प यह हो सकता है कि पीडीपी और कांग्रेस मिलकर सरकार बनाएं. ऐसा तभी होगा जब उनके साथ तीन निर्दलीय सदस्य आने को राज़ी हों.

क्योंकि एकमात्र सीपीआई विधायक एमवाई तरिगामी के पास 'धर्मनिरपेक्ष गठबंधन' के साथ आने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता.

अगर ऐसा हुआ, तो सरकार तो बन सकती है पर उसके स्थिर रहने की संभावना कम होगी.

आदर्श गठबंधन?

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दूसरा विकल्प है भाजपा और नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन. दोनों मिलकर 40 (पीडीपी और कांग्रेस की तरह) का आंकड़ा बनाते हैं.

इन्हें चार और सीटों की ज़रूरत होगी.

ऐसे में सज्जाद लोन की जम्मू कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस की दो सीटें और हाकिम यासीन की एक सीट कारगर साबित होगी.

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इसके बाद भाजपा और एनसी को सरकार बनाने के लिए एक और सीट की ज़रूरत होगी, जिसे हासिल करना बहुत मुश्किल नहीं होगा.

तीसरा और अंतिम विकल्प भाजपा और पीडीपी के गठबंधन के रूप में उभरकर आ सकता है.

जम्मू कश्मीर और पूरे देश की बेहतरी के ख्याल से, जो कि वैचारिक रूप से मुश्किल है, दोनों दल साथ आ सकते हैं.

बाढ़ पुनर्वास

नई सरकार के सामने बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास का मसला सबसे चुनौतीपूर्ण साबित होने वाला है.

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विशेषज्ञ कहते हैं, “इसके हल के लिए प्रदेश और केंद्र सरकार के बीच सौहार्द्रपूर्ण संबंध होने चाहिए. इसलिए पीडीपी और भाजपा को साथ आना होगा.”

'भाजपा और नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन क्यों नहीं' पूछे जाने पर विशेषज्ञों का कहना था, “इसे समझने के लिए पहले चुनाव नतीजों की तह तक जाना होगा. कश्मीर में लोगों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस और जम्मू में कांग्रेस के ख़िलाफ़ वोट दिया है. इसलिए यदि नई सरकार में इनमें से कोई भी दल शामिल होता है तो यह जनभावनाओं से खिलवाड़ होगा.”

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