मोदी सरकार के अध्यादेश पर भड़का विपक्ष

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विपक्षी दलों ने बुधवार को भारत सरकार के कोयला और बीमा क्षेत्र में सुधार के लिए अध्यादेश जारी करने के फ़ैसले का विरोध किया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार कांग्रेस के प्रवक्ता शकील अहमद ने पत्रकारों से कहा, "ये सरकार संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करने में यकीन रखती है. यह एक बड़ा मुद्दा है. यह सरकार संस्थाओं पर आघात कर रही है."

सीपीएम ने अध्यादेश का ये कहते हुए विरोध किया है कि ये विषय पहले ही संसदीय समितियों के विचाराधीन हैं और राष्ट्रपति को ऐसे अध्यादेश पर हस्ताक्षर नहीं करने चाहिेए.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंत्रीमंडल की बैठक के बाद कहा, "यह अध्यादेश आर्थिक सुधारों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता और मजबूत इरादों को दर्शाता है."

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बुधवार को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले मंत्रीमंडल ने बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत कर दी. सरकार ने उन कोयला खदानों की ताज़ा नीलामी के लिए भी अध्यादेश पारित किया, जिनके आवंटन को सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था.

विपक्ष के विरोध के चलते नरेंद्र मोदी सरकार हाल के संसद के शीतकालीन सत्र में इन सुधारों के संबंध में विधेयकों पर वोटिंग नहीं करवा पाई है.

भारत के प्रमुख विपक्षी दल संसद में पिछले कई दिनों से भाजपा के कुछ नेताओं के कथित सांप्रदायिक बयानों और धर्मांतरण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान की माँग पर अड़े हुए थे.

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