कैसा रहा ब्रांड इंडिया के लिए 2014?

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2014 भारत में सत्ता परिवर्तन का साल रहा.

नई सरकार ने पड़ोसियों के लिए नए सिरे से दोस्ती का हाथ बढ़ाया. प्रधानमंत्री मोदी ने नौ देशों का दौरा किया और 10 देशों के नेताओं की आगवानी की.

मगर अमरीका से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक के विदेशी दौरों से कितनी चमकी भारत की छवि?

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की राय में भारत की उपलब्धि शून्य है. बस घूमना फिरना हुआ है.

'कोई प्रगति नहीं'

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वो कहते है, "आपके पास निजी हवाई जहाज़ हैं तो कहीं भी जा सकते हैं, क्या उपलब्धि रही? इनका बर्ताव इतना बुरा रहा है, हमारे इतने अच्छे रिश्ते थे पश्चिम एशिया के देशों के साथ."

मणिशंकर अय्यर का कहना था, "पाकिस्तान के साथ हमारे रिश्ते बेहतर होने चाहिए. उसको उन्होंने रोका और वो भी मनमानी से. अचानक से कह दिया कि आप हुर्रियत से नहीं बात कर सकते हो."

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भारत में लंबे अरसे से विदेश नीति के कुछ ठोस लक्ष्यों के पूरे न होने से बेचैनी महसूस की जा रही है.

परमाणु ऊर्जा को लेकर अमरीका, रूस और ऑस्ट्रेलिया से समझौते हों या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट का मसला - बीते कुछ सालों में बात आगे बढ़ी मगर वो नतीजे नहीं मिले जिनकी उम्मीद की जा रही थी.

वहीं मोदी ने अपने शपथ के समय नवाज़ शरीफ़ को बुलाकर जो पहल दिखाई थी वो भी आगे बढ़ती नहीं दिख रही.

बांग्लादेश के साथ ज़मीन समझौता अटका हुआ है. हालांकि जापान और रूस से रिश्ते मज़बूत हुए हैं लेकिन चीन से जिस तरह के निवेश की उम्मीद थी वो हासिल नहीं हो सका.

मगर सत्ताधारी दल के नेताओं को लगता है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का क़द लगातार बढ़ रहा है.

'नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते'

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पायनियर अख़बार के संपादक और भाजपा राज्यसभा सांसद चंदन मित्र कहते हैं कि आने वाले वर्ष में भारत नई ऊंचाईंया तय करेगा क्योंकि अप्रवासी भारतीय भारत के ब्रांड के लिए काम करेंगे.

वो कहते हैं, "यूएनएससी का विस्तार हमारे हाथ में है ही नहीं. हमें उतावला नहीं होना चाहिए. भारत की अंतरराष्ट्रीय ब्रैंडिंग बढ़ रही है, किसी के लिए संभव नहीं है कि भारत को नज़रअंदाज़ कर अपनी नीति बनाए. अगले चार-पांच साल में आमूल परिवर्तन हो जाएगा."

इस बात में कोई शक नहीं कि मई में सत्ता में आई नई सरकार ने सार्क देशों को साथ लेने से लेकर अमरीकी राष्ट्रपति को गणतंत्र दिवस पर अतिथि बनाने जैसे कई नए प्रयास किए हैं. देखना ये है कि नए साल में उन प्रयासों से क्या नया हासिल होता है.

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