नरभक्षी बाघ की बड़े पैमाने पर तलाश

कर्नाटक में बेलागावी के पास भीमगढ़ अभयारण्य में नरभक्षी घोषित हो चुके एक बाघ की बड़े पैमाने पर तलाश हो रही है.

इस तलाशी अभियान में वन विभाग, पुलिस और सोलिगा आदिवासियों समेत लगभग 300 लोगों को शामिल किया गया है.

तीन साल के इस बाघ ने चिकमगलूर में एक महिला को मार डाला था. इसका व्यवहार इतना असामान्य हो गया था कि इसे ज़िले के क़ॉफ़ी बागानों में गाड़ियों का पीछा करते भी देखा गया.

इसके बाद इसे भीमगढ़ अभयारण्य में स्थानांतरित कर दिया गया था. यह इलाक़ा महाराष्ट्र और गोवा तक फ़ैला हुआ है.

पिछले 17 नवंबर को भीमगढ़ अभयारण्य में टाकेवाड़ी में छोड़ने से पहले, इसके असमान्य व्यवहार पर नज़र रखने के लिए ही रेडियो कॉलर लगाया गया था, लेकिन एक पखवाड़े के बाद ही सिगनल आना बंद हो गए.

नरभक्षी

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इस बीच, बाघ ने एक महिला और एक पुरुष पर हमला किया, एक बैल को मार डाला और 24 दिसम्बर को मुद्गैवाड़ा में एक महिला को मार डाला.

यहां तक कि ये बाघ बेलागावी के बाहरी इलाके में स्थित विश्वैश्वरैया टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी परिसर में भी घुस गया था.

कर्नाटक के प्रमुख वन्यजीव वार्डन विनय लूथरा ने बीबीसी हिंदी को बताया, "बाघ की तलाशी के हमने 10 टीमें बनाई हैं जो रात-दिन अभियान चलाएंगी. यह इलाक़ा बहुत बड़ा है, जंगल सीधी ढलान वाला और सदाबहार है, जिससे बाघ को पहचानने में बहुत दिक्कत है."

एंटी नक्सल फ़ोर्स

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नरभक्षी घोषित किए जाने के बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने इस बाघ को मारने की इजाज़त दे दी है. लूथरा ने कहा, "इसका मतलब यह नहीं है कि हम उसे गोली ही मारेंगे. उसे बेहोश भी किया जा सकता है."

सोलिगा जनजाति की मदद पर लूथरा कहते हैं, "वे बाघ को उसकी धारियों से पहचान लेते हैं. हमने पहले भी मायसूरू में नागरहोल इलाक़े में इनकी मदद ली थी."

तलाशी अभियान में एंटी नक्सल फ़ोर्स और कर्नाटक स्टेट रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स के जवानों को भी लगाया गया है.

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