अमित शाह फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले में आरोप मुक्त

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भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह को बड़ी राहत देते हुए अदालत ने सोहराबुद्दीन फ़र्ज़ी मुठभेड़ और तुलसी प्रजापति हत्या मामले में आरोपों से मुक्त कर दिया है.

मंगलवार को मुंबई में सीबीआई की विशेष अदालत ने अमित शाह की अर्ज़ी पर फ़ैसला सुनाते हुए उन पर लगाए गए सभी आरोपों को ख़ारिज कर दिया.

उन पर हत्या की साज़िश रचने और सबूत मिटाने के आरोप थे. अमित शाह ये दलील देते आए हैं कि ये उनके ख़िलाफ़ राजनीतिक साज़िश है.

इस मामले में सीबीआई की चार्जशीट में अमित शाह के अलावा राजस्थान के मंत्री गुलाबचंद कटारिया और गुजरात पुलिस के कई बड़े अफ़सरों समेत कुल 38 लोगों के नाम शामिल थे.

सोहराबुद्दीन के भाई रोबाबुद्दीन शेख़ ने कहा कि वो इस फ़ैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई ने अमित शाह को बचाया है.

आम आदमी का हमला

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आम आदमी पार्टी ने बीजेपी पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि सीबीआई ने दबाव में आकर अमित शाह के ख़िलाफ़ केस को कमज़ोर किया है.

सीबीआई के मुताबिक़, सोहराबुद्दीन शेख नवंबर 2005 में अपनी पत्नी के साथ बस में हैदराबाद से सांगली जा रहे थे.

सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक गुजरात की एंटी टेररिज्म स्क्वॉड(एटीएस) ने दोनों का पहले अपहरण किया और फिर फ़र्ज़ी मुठभेड़ में उनकी हत्या कर दी.

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Image caption सोहराबुद्दीन और उनकी पत्नी कौसर बी

तक़रीबन सालभर बाद दिसंबर 2006 में इस मामले के गवाह तुलसीराम प्रजापति की भी फ़र्ज़ी मुठभेड़ में हत्या कर दी गई थी.

अमित शाह उस वक़्त गुजरात के गृह मंत्री थे. सीबीआई का दावा था कि सोहराबुद्दीन, उनकी पत्नी कौसर बी और तुलसीराम प्रजापति की हत्या की साज़िश में अमित शाह का हाथ था.

कौन थे सोहराबुद्दीन?

सोहराबुद्दीन मध्य प्रदेश के झारनिया गांव के रहने वाले थे. पुलिस रिकॉर्ड्स के मुताबिक वे कई आपराधिक मामलों में शामिल थे.

उन पर उदयपुर, अहमदाबाद और उज्जैन में गिरोह चलाने का आरोप था.

उनके ख़िलाफ़ जबरन वसूली के भी कई मामलों दर्ज थे.

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