तस्वीरों में झलकता ख़ामोश जुबाँ का दर्द

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संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार समझौते की 25वीं सालगिरह पर यूनिसेफ़ इंडिया ने उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बच्चों के लिए एक फ़ोटोग्राफ़ी कार्यशाला का आयोजन किया.

बच्चों और किशोरों ने कुछ ऐसी तस्वीरें लीं जो भारत की महिलाओं के जीवन से जुड़ी हैं.

कार्यशाला में हिस्सा ले रहे अधिकतर बच्चों ने पहली बार कैमरा पकड़ा था, लेकिन उन्होंने जो तस्वीरें ली, उनसे उस जीवन के बारे में पता चला जो वे जीती हैं और जो संघर्ष वे अपने आस-पास देखती हैं. पायल पहनीं इन बच्चियों की तस्वीर तेलंगाना के अनंतसागर गांव के किशोर ने ली है.

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नागारेखा चिनमाला अनंतसागर में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं. वो छोटे बच्चों को पढ़ाती हैं और महिलाओं को अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करती हैं. ये तस्वीर अरुणा ने ली है.

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भार्गवी ने बूढ़ी महिला की ये तस्वीर अनंतसागर में ली है. भार्गवी कहती हैं, "मैंने ये तस्वीर इसलिए ली क्योंकि बूढ़ी महिला बहुत ही मिलनसार थी और दोपहर का भोजन करने के बाद बहुत प्रसन्न नज़र आ रही थी."

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यह तस्वीर गणेश ने ली है. तस्वीर में एक बच्ची अनंतसागर के आंगनवाड़ी केंद्र में अपनी मां की गोद में आराम कर रही है. मां सलीमा बेगम पहली बार तब यहाँ आई थी, जब वो गर्भवती थी. उन्हें आंगनवाड़ी केंद्र से आयरन की गोलियां मिली थी और अधिक प्रोटीन वाली ख़ुराक लेने को कहा गया. अब वो और उनकी बेटी दोनों सेहतमंद हैं.

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जईता की ये तस्वीर गांवों में महिलाओं की स्थिति बयाँ करती है. पश्चिम बंगाल के माल्दा ज़िले के रायपुर गांव में महानंदा नदी में महिलाएं नहाने के साथ-साथ पीने का पानी भी भर रही हैं. जईता कहती हैं, "हर सुबह महिलाएं नदी के किनारे इकट्ठा होती हैं और जमकर बातें करती हैं."

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आठ साल की साहिबा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इंदिरा नगर की झुग्गियों में अपने परिवार की आमदनी बढ़ाने में मदद करती हैं. इस तस्वीर को लेने वाली ललिता बताती हैं, "मैंने ये तस्वीर इसलिए ली क्योंकि मुझे बुरा लगा कि उसके पास पढ़ने का मौक़ा नहीं है और जिन हालात में वो काम करी थी वे बहुत ख़राब थे."

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माधवी ने लखनऊ के हुसैनाबाद में इस महिला की तस्वीर तब ली जब वो सो रही थी और कई कुत्ते भी उसके आस-पास सो रहे थे.

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मीनाक्षी ने ये तस्वीर तेलंगाना के वेलतूर गांव में ली. ये दोनों बुजर्ग महिलाएं पेड़ के नीचे बैठी थीं. मीनाक्षी बताती हैं कि दोपहर में गांव की महिलाएं पेड़ों की छांव में कुछ देर आराम करती हैं.

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मोनी ने ये तस्वीर पश्चिम बंगाल के माल्दा ज़िले के बेगुनबारी गांव की महिला कामगारों की है. ये महिलाएं गांव के ही एक तालाब में काम कर रही थी.

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ये तस्वीर भी मोनी ने ली है. बेगुनबारी गांव में ये गर्भवती महिला अपने घर के बाहर कुछ फुर्सत के क्षणों में. मोनी कहती हैं, "मैंने ये तस्वीर इसलिए ली, क्योंकि मैं ये देखकर हैरान थी कि इस महिला की इतनी कम उम्र में शादी हो गई. वह सिर्फ़ 17 बरस की थी और उसे आठ महीने का गर्भ था."

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सर्वणी ने ये तस्वीर अनंतसागर गांव में ली है. सर्वणी कहती हैं, "मुझे इस महिला के कपड़ों के रंग सज्जा बहुत अच्छी लगी. वो गली में खेल रहे बच्चों को देखकर मुस्करा रहीं थीं."

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