क्यों लुढ़के भारतीय बाज़ार?

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भारतीय शेयर बाज़ारों में मंगलवार को भारी गिरावट दर्ज की गई.

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 854 अंक, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ़्टी 251 अंक गिरकर बंद हुआ.

शेयरों की पिटाई का अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि 30 शेयरों वाले सेंसेक्स में सिर्फ़ एचयूएल का शेयर ही हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ.

24 अक्टूबर 2008 के बाद भारतीय शेयर बाज़ारों में एक दिन में यह सबसे बड़ी गिरावट है.

पाँच वजहें जिनसे गिरे बाज़ार

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कच्चा तेल: कच्चे तेल की क़ीमतें लगातार गिर रही हैं. ओवरसप्लाई की चिंताई के चलते नाइमैक्स क्रूड 50 डॉलर प्रति बैरल के नीचे लुढ़क गया है.

अमरीका में कच्चे तेल के स्टॉक में भारी इज़ाफ़ा हुआ है. साथ ही रूस, इराक़, पश्चिमी अफ़्रीका, कनाडा भी कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ा रहे हैं.

यही नहीं, दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक सऊदी अरब एशियाई देशों को डिस्काउंट भी दे रहा है.

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यूनान संकट: ग्रीस के यूरोज़ोन से बाहर होने की चिंताओं के चलते डॉलर के मुक़ाबले यूरो में भारी गिरावट आई है.

महंगा कर्ज़

ब्याज दरें: महंगाई दर में लगातार कमी के बावजूद भारतीय रिज़र्व बैंक ने ब्याज दरों मे कटौती नहीं की है.

उद्योग जगत को उम्मीद थी कि आरबीआई गवर्नर मौजूदा हालात में ब्याज दरों में कटौती की घोषणा जल्द कर सकते हैं.

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एफ़आईआई निवेश में कमी: पिछले साल दिसंबर में विदेशी संस्थागत (एफ़आईआई) निवेश में कमी आई है. दिसंबर में एफ़आईआई निवेश 10 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया था.

दिसंबर में एफ़आईआई ने भारतीय शेयर बाज़ारों में कुल 2,132 करोड़ रुपए का निवेश किया. फ़रवरी 2014 के बाद किसी महीने में यह सबसे कम एफ़आईआई निवेश था.

ख़राब नतीजों की आशंका: अक्टूबर-दिसंबर में कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से ख़राब रहने की आशंका है. हालांकि रुपए में गिरावट के कारण आईटी और फ़ार्मा कंपनियों का मुनाफ़ा बढ़ने की उम्मीद है.

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