'इस बार वो कार्टून बनाने वालों के लिए आए'

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दुनिया भर की मीडिया ने फ्रांस में व्यंग्य पत्रिका शार्ली एब्डो के दफ़्तर पर हुए हमले की निंदा की है.

अख़बार की सुर्ख़ियों के अलावा संपादकीय और ओप-एड पेज पर भी इस हमले पर प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है.

ब्रिटेन के अख़बार 'द गार्डियन' ने अपने संपादकीय के शीर्षक में लिखा है, "दोज़ गन्स वेयर ट्रेंड ऑन फ़्री स्पीच"(वो बंदूकें अभिव्यक्ति की स्वंत्रता पर चली हैं).

ब्रिटेन के एक अन्य अख़बार 'दी इंडिपेंडेंट' ने इस ख़बर पर लिखा है कि दुनिया इस दुख की घड़ी में एकजुट है.

'स्वतंत्रता के ख़िलाफ़ युद्ध'

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ब्रिटेन के ही एक अख़बार द टेलिग्राफ़ ने इसे स्वतंत्रता के ख़िलाफ़ युद्ध कहा है. अख़बार ने शीर्षक दिया है, "वार ऑन फ़्रीडम". (स्वंत्रता के ख़िलाफ़ युद्ध).

सऊदी अरब के एक अख़बार सऊदी गैज़ेट ने सऊदी अरब की ओर से इस घटना की निंदा की ख़बर को अपनी पहली ख़बर बनाई है.

अमरीकी अख़बार ऩ्यूयॉर्क टाइम्स ने एक कार्टून छापा है जिसमें लिखा है, "विदाउट ह्यूमर वी आर ऑल डेड". (हंसी के बिना हम मर जाएँगे).

पहले वो....

भारतीय अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने इस हमले पर साहित्यिक अंदाज में शीर्षक दिया है, "दे केम फ़ॉर कार्टूनिस्ट" (इस बार वो कार्टून बनाने वालों के लिए आए).

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अख़बार का शीर्षक एक प्रसिद्ध कविता ' फ़र्स्ट दे केम...' पर आधारित प्रतीत होती है.

एक अन्य भारतीय अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने पेरिस में हुए इस हमले को पहले पन्ने पर जगह देते हुए हमले में मारे गए शार्ली एब्डो के संपादक की एक टिप्पणी प्रकाशित की है जिसमें उन्होंने कहा है, "जब मैं लिखता हूं तो मुझे ऐसा महसूस नहीं होता है कि मैं किसी की हत्या कर रहा हूं क़लम से. लेकिन जो एक्टिविस्ट होते है वे अपनी हिंसा के लिए बहाने ढूंढ लेते हैं."

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