पोस्टल बैलेट से बेहतर होगी प्रॉक्सी वोटिंग?

अप्रवासी भारतीयों के चुनाव में हिस्सा लेने के लिए अबू धाबी में रहने वाले एनआरआई शमशीर वयल्लील ने एक जनहित याचिका दाखिल की थी.

इस पर सुनवाई करने के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा था कि इस बारे में क्या कदम उठाए जा सकते हैं.

चुनाव आयोग ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि हम प्रॉक्सी वोटिंग और पोस्टल बैलेट का सहारा ले सकते हैं.

पोस्टल बैलेट को लेकर मेरे मन में एक संशय है.

इसमें जोख़िम ये है कि लंदन और कुवैत में बैठकर आप किस-किस को अपना बैलेट दिखा रहे हैं या पैसे ले रहे हैं या नहीं, इन सबका पता नहीं चल पाएगा.

इसलिए पोस्टल बैलेट में भ्रष्टाचार हो सकता है और गोपनीयता भी नहीं रहने का ख़तरा है.

गोपनीयता पर सवाल

ऐसे में मेरे ख्याल से प्रॉक्सी वोटिंग सही तरीका होगा.

इसमें आप अपने परिवार के किसी सदस्य को, रिश्तेदार को या फिर जानने वाले को अपना मत देने के लिए अधिकृत कर सकते हैं.

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वो चुनाव के दौरान जाकर आपका वोट गोपनीयता से डाल सकता है.

अभी ये तय नहीं है कि सरकार प्रॉक्सी वोटिंग का विकल्प अपनाएगी या फिर पोस्टल बैलेट का.

पोस्टल बैलेट को ईमेल से किसी के पास भेजना बहुत आसान है लेकिन इसमें गोपनीयता नहीं रहेगी. भ्रष्टाचार और धमकाने की आशंका भी बनी रहेगी.

भारत से बाहर पढ़े-लिखे लोगों को प्रभावित करना आसान नहीं होगा लेकिन मध्य-पूर्व के देशों में हमारे लाखों लोग मजूदरी करते हैं, उन्हें प्रभावित करना आसान होगा.

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इन लोगों को विभिन्न प्रलोभनों के ज़रिए प्रभावित किया जा सकता है.

सबसे बेहतर उपाय

एक विकल्प यह हो सकता है कि लोग रिमोट वोटिंग करें यानी इंटरनेट के जरिए वोट दे दें, लेकिन वहां हैकिंग की बड़ी समस्या है.

यानि आपने वोट किसी को दिया और हैकर ने उसे किसी और पर ट्रांसफर कर दिया. इसका पता भी नहीं चल पाएगा.

ऐसे में मेरे ख्याल से प्रॉक्सी वोटिंग सबसे सुरक्षित तरीका है और यह आसानी से लागू भी हो पाएगा. यह सबसे सुरक्षित भी है.

मेरे ख्याल से सरकार को इसे ही अपनाना चाहिए.

(निखिल रंजन से बातचीत पर आधारित)

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