सरदार पटेल के बाद लाजपत राय पर राजनीति?

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भारतीय जनता पार्टी की मुख्यमंत्री पद की दावेदार किरण बेदी का चुनाव प्रचार नामांकन भरने से पहले ही विवादों में घिर गया है.

भारत की आज़ादी के संघर्ष के बड़े नेताओं में से एक लाला लाजपत राय की प्रतिमा पर किरण बेदी ने भाजपा के रंग वाला दुपट्टा डाला, जिसकी कड़ी आलोचना हो रही है.

कृष्णा नगर से नामांकन भरने से पहले किरण बेदी ने लाला लाजपत राय की प्रतिमा को साफ़ किया, उस पर दुपट्टा डाला और फूल-माला चढ़ाई.

इसका राजनीतिक हलकों में विरोध हुआ है. कुछ विश्लेषक मानते हैं कि सरदार पटेल, महात्मा गांधी, मदनमोहन मालवीय के बाद भाजपा आज़ादी के दौर के एक अन्य बड़े कांग्रेसी नेता को अपनाने की कोशिश कर रही है.

'भगवाकरण न करे भाजपा'

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जन लोकपाल आंदोलन में किरण बेदी के सहयोगी रहे आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल ने उन पर तीखे वार किए हैं.

केजरीवाल ने उन्हें आज़ादी के आंदोलन से जुड़े नेताओं को राजनीति में न घसीटने की हिदायत दी है.

केजरीवाल ने कहा कि किरण बेदी आज़ादी के आंदोलन से जुड़े लोगों को बख़्श दें और आजादी के आंदोलन का भगवाकरण न करें.

दिल्ली कांग्रेस के नेता अरविंदर सिंह लवली ने किरण बेदी पर लाजपत राय का अपमान करने का आरोप लगाते हुए मांग की कि वे इसके लिए देश से माफ़ी मांगें.

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उन्होंने यह भी कहा कि लाजपत राय हमेशा ही आरएसएस की नीतियों और सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ रहे.

इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे पर किरण बेदी का बचाव करने में जुट गई.

पार्टी के नेता संबित पात्रा ने कहा कि बेदी ने दुपट्टा प्रतिमा में लपेट कर औोर माला चढ़ा कर लाजपत राय का सम्मान ही किया है, अपमान नहीं.

इस मुद्दे पर राजनीति तो भाजपा का विरोध करने वाले दल कर रहे हैं, उन्हें ऐसा करने का कोई हक़ नहीं है.

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पर्चा भरते वक़्त किरण बेदी के साथ भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली ईकाई के प्रमुख सतीश उपाध्याय व दूसरे नेता भी मौज़ूद थे.

हालाँकि मंगलवार को सतीश उपाध्याय और कुछ अन्य भाजपा नेताओं के समर्थकों ने नेताओं को टिकट न दिए जाने पर ज़बरदस्त गुस्सा जताया था.

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