निठारी: कोली को फांसी नहीं, उम्र क़ैद

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निठारी हत्याकांड के दोषी सुरेंदर कोली की फांसी की सज़ा को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उम्र क़ैद में तब्दील कर दिया है.

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल मार्च में कोली को रिम्पा हलदर की हत्या का दोषी ठहराते हुए उन्हें मृत्युदंड देने का आदेश दिया था.

इसके बाद वकीलों के समूह 'डेथ पेनल्टी लिटिगेशन ग्रुप' ने कोली को मृत्युदंड दिए जाने पर पुनर्विचार याचिका दायर की थी, तब सुप्रीम कोर्ट ने मामले को फिर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में भेजा था.

इस ग्रुप का कहना था कि निठारी हत्याकांड में कोली के ख़िलाफ़ कुल 15 अन्य मामले अलग-अलग अदालतों में चल रहे हैं और कोली को फांसी दिए जाने से बाक़ी मामलों में फ़ैसलों पर प्रभाव पड़ेगा.

बीबीसी हिंदी के लिए लखनऊ से अतुल चंद्रा ने बताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सुरिंदर कोली पर नरमी दिखाते हुए फांसी की सजा को उम्र क़ैद में तब्दील किया है.

निठारी का मामला

साल 2006 में उत्तर प्रदेश पुलिस को नोयडा के निठारी गाँव स्थित पंधेर के घर के पीछे और आसपास बच्चों और महिलाओ के कंकाल मिले थे.

उस समय पुलिस ने पंधेर और कोली पर क़रीब 19 बच्चों और महिलाओं की हत्या और बलात्कार का आरोप लगाया था.

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Image caption कोली की माँ का कहना है कि फांसी से बाक़ी दोषियों को सजा नहीं मिल पाएगी.

निठारी कांड में मोनिंदर सिंह पंधेर को भी अभियुक्त बनाया गया था, लेकिन पहले मामले में उन्हें अदालत ने बरी कर दिया है. कोली पंधेर के यहाँ नौकरी करते थे.

पंधेर के ख़िलाफ़ बाक़ी केस निचली अदालतों में चल रहे हैं.

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