दिल्ली में लगा कला का मेला

इंडिया आर्ट फ़ेयर, दिल्ली इमेज कॉपीरइट Preeti Mann

दिल्ली के एनएसआईसी एक्जिबीशन ग्राउंड में चल रहा चार दिवसीय इंडिया आर्ट फेयर देश का सबसे प्रतिष्ठित कला मेला है, जिसमें कई देशी व विदेशी कलाकार भाग लेते हैं.

ये कलाकार मेले की 85 गैलरियों और 90 बूथों पर 3500 आर्टवर्क, पेंटिंग्स, स्कल्पचर, इंस्टालेशन, न्यू मीडिया और परफॉरमेंस आर्ट के जरिए अपनी कृतियों को प्रदर्शित कर रहे हैं.

वहीं स्पीकर्स फोरम में कई आर्टिस्ट, आर्ट क्रिटिक, आर्ट क्यूरेटर, आर्ट राइटर्स की आर्ट टॉक भी आयोजित की जा रही है.

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स्मृति दीक्षित का 'मेमोरी ऑफ़ द रेड' नाम से इंस्टालेशन बहुत रोचक है, स्मृति ने फेयर के पहले दिन अपने इंस्टालेशन को रूप देना शुरू किया और आर्ट फेयर के साथ-साथ उनका ये इंस्टालेशन भी आगे बढ़ रहा है.

'मेमोरी ऑफ़ द रेड' में स्मृति स्त्री समर्पण को दर्शा रही हैं, उनके अनुसार स्त्री किसी बेल की तरह बिना किसी अहम के शांति से अपना रास्ता बनाते हुए आगे बढ़ती रहती है, अपने दृढ़ अस्तित्व से अनजान विनम्रता और धैर्य से एक दिन वो सारे वृक्ष पर फ़ैल जाती है, बिना किसी शोर बिना किसी द्वंद्व वो बरगद के समान विशाल वृक्ष को भी झुका लेती है.

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प्रियंका चौधरी ने 'हाऊ टू बिकम ए लेमन बटरफ्लाई' नाम से इंस्टालेशन प्रस्तुत किया, लेमन बटरफ्लाई को बटरफ्लाई ऑफ़ डेथ भी कहा जाता है. ये खूबसूरत तितली है और इसका कैटरपिलर निम्बू के पौधे को नष्ट करने के लिए प्रसिद्ध है.

आर्टिस्ट सफ़ेद कपड़ो में हैं वो इस पौधे की ओर झुककर अपने होंठो से उसकी पत्तियां तोड़ती हैं और धीरे-धीरे उसे चबाती हैं और इसी तरह पौधे की सारी पत्तियां चबाने पर उसकी लार उसके सफ़ेद कपड़ों पर गिरती रहती है और एक घंटे के अंदर पौधे की सारी पत्तियां बारीक़ हरे छींटों के रूप में किसी पेंटिंग की तरह आर्टिस्ट के सफ़ेद कपड़ों पर उतर आती हैं.

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दिल्ली आर्ट गैलरी की प्रदर्शनी 'विज़ुअल हिस्ट्री ऑफ़ इंडियन मॉडर्न आर्ट' भी आकर्षण का केंद्र रही. यहाँ भारतीय कला के सफर को बखूबी देखा और समझा जा सकता है.

इस मिनी म्यूजियम में दर्शकों के लिए म्यूजियम टूअर की भी व्यवस्था है जिससे भारतीय कला इतिहास को समझने में आम दर्शक को बहुत सुविधा होती है. और हर दीर्घा में प्रदर्शित कलाकारों के काम को जानने के लिए कंप्यूटर व हैडफ़ोन के द्वारा प्रदर्शित कलाकार के इंटरव्यू को देखा व सुना जा सकता है.

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रिकॉलिंग नाम से गैलरी श्राइन में प्रदर्शित बांग्लादेशी कलाकार तैयब्बा बेगम लिपी की कृति 2013 में ढाका की आठ मंजिला राना प्लाजा इमारत के ढहने पर उन्हें इस कृति को बनाने का ख्याल आया.

रिपेयरिंग का सिंबल ये आर्टवर्क सैकड़ों रेज़र यानी आम जीवन में उपयोग होने वाली ब्लेड से बनाई गई है.

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विकास मल्होत्रा की 'द विलेज गर्ल' नाम से प्रदर्शित फोटो बरबस ही आपका ध्यान अपनी ओर खींच लेती है.

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वंडर वाल नाम से प्रदर्शित विभिन्न फोटोग्राफरों जैसे अजय राजगरिया, अम्बर हम्माद, बी अजय शर्मा, रेग फलाह, सादिया कोचर, उदित कुलश्रेष्ठ व विकास मल्होत्रा की तस्वीरों ने दर्शकों का ध्यान बखूबी अपनी और खींचा.

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नन्तु दास बिहारी की कृति को बनाने में चार माह का समय लगा यह महात्मा गाँधी के तीन बंदरों से प्रेरित है, इस मॉडर्न कृति में कलाकार यह निर्णय दर्शक पर ही छोड़ता है कि वह गाँधी जी के दर्शन को किस तरह देखता है.

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दयानिता सिंह देश की चर्चित फोटोग्राफर हैं. उनका प्रोजेक्ट म्यूजियम ऑफ़ चान्स - बुक ऑब्जेक्ट किताब भी है और प्रदर्शनी भी. हर किताब में 88 फ़ोटो हैं और 88 अलग अलग कवर हैं. इन किताबों में दयानिता की 30 वर्षों में की गई फोटोग्राफी संग्रहित है.

दयानिता सिंह ने इन चित्रों को 352 किताबों में संगृहित किया है यह लकड़ी की फ्रेम की तरह है जिसे दीवार पर टांगा भी जा सकता है और मेज़ पर सजाया भी जा सकता है.

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राहुल कुमार के 101 विभिन्न रंगो में बने सिरेमिक इंस्टालेशन 'सर्कल अनसर्कल' नाम से प्रदर्शित किया गया जो काफी पसंद किया जा रहा है.

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