सात समंदर पार से आया सरपंच

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देश के पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू ने नागौर से 1959 में पंचायती राज की शुरुआत की थी.

अब 56 साल के इतिहास में शायद यह पहली बार हुआ है कि इस ज़िले की किसी पंचायत में सात समंदर पार से कोई सरपंच की ज़िम्मेदारी लेने आया हो.

फररोड ग्राम पंचायत के नवनिर्वाचित सरपंच 27 वर्षीय हनुमान ऑस्ट्रेलिया के मशहूर पर्यटक स्थल गोल्डकोस्ट में एक रिसॉर्ट में मैनेजर की अपनी अच्छी कमाई वाली नौकरी छोड़ मारवाड़ की धरती पर लौट आए हैं.

राजस्थान सरकार ने इस बार के चुनाव में सरपंच पद के लिए आठवीं पास होना अनिवार्य कर दिया था. इस वजह से फररोड में राजनीति में सक्रिय वरिष्ठ लोग चुनाव लड़ने योग्य नहीं रहे.

ऐसे में हनुमान को गांव वापस बुलाने का निर्णय लिया गया.

युवाओं का समर्थन

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गाँव के युवाओं से हनुमान का जुड़ाव रहा है और वे रक्तदान शिविर सहित कुछ सामाजिक गतिविधियां अपने विद्यार्थी जीवन से ही करवाते रहे हैं. इसलिए उन्हें युवाओं ने ख़ासतौर पर बहुत समर्थन दिया.

हनुमान के लिए विशेष प्रेरणा रहे और लंदन में रह रहे उनके भाई, जिन्होंने कहा कि घर की आर्थिक जिम्मेदारी वो संभालेंगे और हनुमान पंचायत की जिम्मेदारी निभाएं.

हनुमान ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने अपने चुनाव प्रचार में सबसे 'जात-पात' से ऊपर उठकर सोचने की बात कही और उनके मुताबिक़ सबने सहमति भी जताई.

विकास की शुरुआत

अब उनका सपना है कि उनकी ग्राम पंचायत में भी सरकारी स्कूल भी प्राइवेट जैसे अच्छी आधारभूत सुविधा वाले हों, बेहतर मेडिकल सुविधा हो.

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हनुमान अपनी पंचायत में जल संरक्षण के लिए भी काम करना चाहते हैं.

सिंगापुर से टूरिज़्म और होटल मैनेजमेंट में डिप्लोमा और ऑस्ट्रेलिया से व्यवसाय पाठ्यक्रम में स्नातक हनुमान अब पंचायत का प्रबंधन संभालेंगे.

ऐसा नहीं है कि वे ज़मीनी हकीकत और ग्रामीण राजनीति की चुनौतियों से अनजान से हैं, पर उनका मानना है कि विकास की शुरुआत कहीं तो करनी ही होगी.

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