कोलकाता का पार्क स्ट्रीट होगा वाई-फ़ाई

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सिटी आफ जॉय के नाम से मशहूर कोलकाता गुरुवार की शाम को देश की पहली वाई-फ़ाई सिटी होने की दिशा में पहला कदम बढ़ा रहा है.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी महानगर के पार्क स्ट्रीट इलाके में पहले वाई-फ़ाई हॉट स्पॉट ज़ोन का उद्घाटन कर रही हैं. लेकिन वाई-फ़ाई की ओर बढ़े इस पहले कदम की मज़बूती यानी इसके नेटवर्क की रफ्तार को लेकर विशेषज्ञ संशय में हैं.

ममता बनर्जी की अगुवाई वाली राज्य सरकार काफी धूम-धाम से इस बात का प्रचार कर रही है. पूरा शहर बैनर और होर्डिंग से पटा है. अखबारों में भी इसके बड़े-बड़े विज्ञापन छपे हैं.

कटु अनुभव

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शुरुआत में यह सेवा मुफ़्त होगी. वाई-फ़ाई सेवा मुहैया कराने वाली कंपनी रिलायंस जियो ने अब तक इसका कोई तकनीकी ब्यौरा नहीं दिया है. उसने यह भी नहीं बताया है कि आखिर वह मुफ़्त सेवा कैसे और कितने दिनों तक देगी.

सरकार का दावा है कि यह सेवा बेहतरीन होगी. लेकिन विशेषज्ञों ने इस पर सवाल उठाए हैं.

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उनका कहना है कि देश के दूसरे शहरों में ऐसी सेवाओं का अनुभव अच्छा नहीं रहा है. ऐसे में मुफ़्त में मिलने वाली वाई-फ़ाई सेवा के उपभोक्ताओं की भारी तादाद पूरे नेटवर्क को धीमा कर सकती है.

रिलायंस जियो के एक प्रवक्ता ने कहा, "कंपनी ने महानगर में पांच सौ किलोमीटर लंबा आप्टिकल फाइबर केबल बिछाया है. हमारा लक्ष्य कोलकाता टेलीफोन इलाके को अपने 4जी कवरेज के दायरे में लाना है. लेकिन इसमें 8 से 12 महीनों का समय लगेगा."

ममता ने कोलकाता पुस्तक मेले के उद्घाटन के दौरान वाई-फ़ाई सेवा शुरू करने का एलान किया था. तब वहां मौजूद रिलायंस जियो के बिजनेस हेड (पूर्व) तरुण झुनझुनवाला ने कहा था, "अगले दो महीने में पूरा महानगर वाई-फ़ाई हो जाएगा. यह देश का पहला महानगर होगा जहां 4जी इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध होंगी."

गुणवत्ता

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कंपनी बंगाल में 4जी सेवाओं पर 3300 करोड़ रुपए खर्च कर रही है.

इस सेवा की निगरानी करने वाले कोलकाता नगर निगम के मेयर शोभन चटर्जी कहते हैं, "अब हम सिंगापुर और ताइपे जैसे उन्नत शहरों की कतार में शामिल हो जाएंगे."

लेकिन तमाम दावों के बावजूद विशेषज्ञ इस सेवा को लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं हैं. जादवपुर विश्वविद्यालय में कंप्यूटर विज्ञान के प्रोफेसर चंदन मजुमदार कहते हैं, "अगर योजना सही नहीं होगी तो पूरा नेटवर्क जाम हो जाएगा. वाई-फ़ाई जोन की स्थापना एक महंगा सौदा है. देखना होगा कि यह सेवा कैसी साबित होती है."

भारतीय इंजीनियरिंग, विज्ञान और तकनीक संस्थान (आईआईईएसटी) के प्रोफेसर अजय राय कहते हैं, "हमारे संस्थान में भी वाई-फ़ाई की सुविधा है. लेकिन ज्यादा लोगों के लॉग-इन करने पर यह धीमी हो जाती है. पार्क स्ट्रीट जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में भी इसका खतरा है."

विशेषज्ञों का कहना है कि इस सेवा की गुणवत्ता ऑप्टिकल फाइबर केबल पर निर्भर है.

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