बिहार में सियासी घमासान, उठा-पटक जारी

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बिहार में बदलते राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच सत्तारूढ़ जनता दल (यूनाइटेड) ने नीतीश कुमार को एक बार फिर विधानमंडल दल का नेता चुन लिया है.

यह जानकारी बिहार सरकार के संसदीय कार्यमंत्री श्रवण कुमार ने दी. उन्होंने यह भी बताया कि आगे की रणनीति तय करने के लिए भी नीतीश कुमार को ही अधिकृत किया गया है.

विधानमंडल दल का नेता चुने जाने के बाद नीतीश कुमार ने कहा कि उन्हें राजद, कांग्रेस और वामपंथी दलों का भी समर्थन हासिल हैं और उनके साथ 130 से ज़्यादा विधायक हैं.

सूत्रों के अनुसार जदयू की बैठक में उसके 111 में से 97 विधायक शामिल हुए. जबकि 41 विधान पार्षदों में से 37 पार्षद इसमें शामिल हुए.

जीतनराम मांझी बीजेपी का एजेंडा चला रहा थे: श्याम रजक

दूसरी ओर मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने राज्यपाल को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि वो जनता दल (यू) की बैठक में हुए फ़ैसले पर कोई क़दम न उठाएँ, क्योंकि विधायक दल की बैठक बुलाने का अधिकार पार्टी अध्यक्ष को नहीं है. साथ ही उन्होंने नीतीश कुमार समर्थक 15 मंत्रियों को मंत्रिपरिषद से हटाने की भी सिफ़ारिश की है.

जीतनराम मांझी अब दिल्ली पहुँच गए हैं. इस बीच मांझी सरकार के 19 मंत्रियों ने भारत के राष्ट्रपति और बिहार के राज्यपाल को पत्र लिखकर यह आग्रह किया है कि वे जीतनराम मांझी के विधानसभा भंग करने की सिफारिश पर विचार न करे.

वहीं बिहार भाजपा के नेता सुशील कुमार मोदी ने दोहराया है कि पार्टी के सारे विकल्प खुले हैं और उसकी पल-पल पर नजर है. साथ ही मोदी ने यह भी कहा कि भाजपा राज्य में चुनाव कराए जाने के पक्ष में है.

लेकिन राजनीतिक घटनाक्रम यही थमता नज़र नहीं आ रहा है. अब सबकी नज़रें मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी और राज्यपाल के फ़ैसले पर टिकी हुई है.

सुबह से ही चल रहे सियासी घमासान में पहले जीतनराम मांझी ने नीतीश कुमार से मुलाक़ात की. उस समय ऐसे कयास लगाए जाने लगे कि वे शायद अपने पद से त्यागपत्र दे देंगे.

लेकिन इसके बाद कैबिनेट की बैठक में जीतनराम मांझी समर्थक मंत्रियों ने विधानसभा भंग करने की सिफ़ारिश भेजने का प्रस्ताव रखा, लेकिन नीतीश समर्थक मंत्रियों के मुताबिक़ उसे सिर्फ़ सात मंत्रियों का ही समर्थन मिला.

प्रस्ताव

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बैठक से बाहर निकलते हुए नीतीश खेमे के माने जाने वाले मंत्रियों ने बताया कि प्रस्ताव का समर्थन केवल सात मंत्रियों ने किया जबकि 21 मंत्रियों ने इसका विरोध किया. इस संबंध में मंत्री श्याम रजक ने बताया कि बैठक में मंत्री नरेंद्र सिंह ने विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव पेश किया जिसे ज्यादातर मंत्रियों ने खारिज कर दिया गया.

अब आगे ये देखना होगा कि मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी इस मुद्दे पर क्या करते हैं.

इस बीच बिहार के कार्यकारी राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री मांझी के उस अनुशंसा को स्वीकार कर लिया है जिसमें उन्होंने अपने दो मंत्रियों को बर्खास्त करने की अनुशंसा की थी.

राजभवन से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है- मुख्यमंत्री की सलाह पर महामहिम राज्यपाल ने यह निर्णय लिया है कि प्रशांत कुमार शाही और राजीव रंजन सिंह उर्फ लल्लन सिंह तत्कालीन प्रभाव से राज्य के मंत्री और मंत्री परिषद के सदस्य नहीं रहेंगे.

243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में जनता दल (यू) के 115, भाजपा के 88, राष्ट्रीय जनता दल के 24 और कांग्रेस के पाँच विधायक हैं.

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