भारत-पाकिस्तान मैचः जंग के हज़ार बहाने!

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विश्व कप में भारत और पाकिस्तान का मैच रविवार को खेला जाना है. आप इसके बारे में पहले से जानते हैं.

अगर आप किसी और ग्रह से न आए हों या फिर आप एआईबी के सदस्य हैं और अग्रिम जमानत लेने में व्यस्त हों तो और बात है.

या फिर आपकी दिलचस्पी इस बात को जानने में ज़्यादा है कि अच्छे दिन कब आएंगे या क्या वे सचमुच आ चुके हैं.

पढ़े विस्तार से

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अगर आप मेरी तरह सवेरे उठते हैं तो आपके पास मैच शुरू होने से पहले वक़्त होगा और आप टॉस से ठीक पहले आप ये लेख पढ़ रहे होंगे.

और अगर आप को देरी से उठने की आदत है तो ये मैच शुरू हो चुका होगा. यह मैच सवेरे 8:30 बजे शुरू होना है. ख़ैर मेरी सलाह है कि आप ये लेख पढ़ें.

शायद मेरी तरह आप भी जब अपनी टीम को पुराने दुश्मन से भिड़ते देखेंगे तो हर बार की तरह तनाव में पड़ जाएंगे.

तो मैं आपसे साझा करना चाहता हूं कि इस 'विकट स्थिति' से निपटने के लिए मैंने क्या तरीक़ा सोचा है. मैं यह दशकों से करता आ रहा हूं.

ख़ुशनुमा पहलू

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मुझे इसका तजुर्बा है. जब क्रिकेट की बात आती है तो मेरी पहली ख्वाहिश है कि ग्रुपों के निर्धारण कुछ इस तरह से हो कि भारत को पाकिस्तान से खेलना ही न पड़े.

और फिर कौन सी टीम किसके साथ भिड़ेगी, इसका फ़ैसला तो किस्मत ही करती है.

दोनों देशों के तनाव का सबसे ख़ुशनुमा पहलू ये है कि क्रिकेट के नाम पर बनने वाले रिश्ते अब तकरीबन ख़त्म हो चुके हैं.

मुमकिन है कि इससे दूसरे लोगों को निराशा हुई हो. जिन्हें इनके मुक़ाबले में जोश की कमी खलेगी, वे सप्ताहांत पर 'बंजी जंपिंग' या उल्टी कूद लगाने चले जाएं.

मैच का जोश

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लेकिन इससे मुझे बहुत राहत मिली है. बीते दशक में मैं दिल का दौरा पड़ने के ख़तरे से एक दो बार बच चुका हूं. लेकिन हम 2015 के विश्व कप के चश्मदीद बनने जा रहे हैं.

लड़ाई हमारे सिर पर आ गई है और मैच की इस उत्तेजना से दिमाग को सक्रिय करने वाले एड्रेनलाइन और छाती के दर्द की संभावित तकलीफ से बचने का अब कोई उपाय नहीं रहा है.

जहां तक क्रिकेट की मेरी समझ है, रविवार के भारत पाकिस्तान मुक़ाबले के तीन संभावित नतीजे हो सकते हैं. हम जीत जाएंगे या हार जाएंगे या फिर मुक़ाबला बराबरी पर छूट जाएगा.

मैच का नतीजा!

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मैंने कहीं पढ़ा है कि चार ऐसे मौके आए जब हम उनसे खेले और कोई नतीजा नहीं निकला. जब मैच शुरू भी नहीं हुआ है, मुझे मैच के बराबरी पर छूटने से कोई दिक़्क़त नहीं है.

सभी खिलाड़ी, दर्शक, सटोरिये, हम सभी घर चले जाएं ताकि मैच की तकलीफ़ से गुजरना न पड़े जो इस तरह के मुक़ाबले में अकसर होता है.

हालांकि सब कुछ इतना भी आसान नहीं है, यहां तक कि जब हमारी टीम जीत भी जाती है तब भी. जीत के जश्न को दरियादिली के साथ पचाना भी तो पड़ता है.

यह इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि मेरे कुछ दोस्त पाकिस्तान से भी हैं और मैं उन्हें उनके देश से अधिक पसंद करता हूं.

जीत का औसत

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उदाहरण के लिए अगर हम रविवार को जीत जाएंगे तो हमें पाकिस्तानियों से कहना चाहिए, "देखिए, यह सही है कि हम बेहतर टीम थे लेकिन आपने हमारे ख़िलाफ़ अधिक मुक़ाबले (73) जीते हैं जबकि हमने आपको 50 बार ही हराया है."

इसलिए कुछ है जो इस सूरत में कहा जा सकता है. दूसरी तरफ अगर हम हार जाते हैं तो मैं पाकिस्तानियों को ये याद दिलाउंगा कि यह पहली बार है जब आपने हमें विश्व कप में हराया है.

मैं उन्हें कहूंगा कि हमने आपको 1992, 1996, 1999, 2004 और 2011 में हराया था. उनकी इस जीत को औसत के लिहाज से कमतर साबित करने की कोशिश करूंगा.

धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र

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और फिर इस बात की भी संभावना रहती है कि मुक़ाबला कड़वाहट में बदल जाए. और अगर ऐसा हुआ तो मेरी राय इसी हिसाब से बदल जाएगी.

अगर माहौल ज़्यादा ही बिगड़ जाए और हम ये मुक़ाबला हार जाएं तो मैं ख़ुद को और पाकिस्तानियों को ये याद दिलाने की पूरी कोशिश करूंगा कि हम एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र हैं और वे एक मजहबी देश हैं.

हमारे मंदिरों और मस्जिदों में बम धमाके नहीं होते हैं, जो उनके यहां हर दूसरे दिन होता है. दूसरी बात ये कि हमारी अर्थव्यवस्था अच्छा काम कर रही है जबकि उनके लिए ये बुरा वक़्त है.

पाकिस्तानी धारावाहिक

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एक क्रिकेट मैच की हार से क्या फ़र्क़ पड़ता है जब बाक़ी मुकाबलों में जीत रहे हों और ये पूरी दुनिया जानती है.

दूसरी तरफ अगर हम रविवार का मैच जीत जाते हैं तो मैं थोड़ा नरम हो जाउंगा और कहूंगा, "हां, हम जीते और हमारे पास बॉलीवुड है लेकिन आपके टीवी धारावाहिक बुरे नहीं होते और बहुत से भारतीय उन्हें देखते हैं."

मुझे हैरत है कि दिन ख़त्म होने पर जब जीत की खुमारी या हार का गम पीछे छूट जाएगा, मुझे कैसा लग रहा होगा. मुझे इस पल इसका अंदाजा नहीं है.

आपने देखा, मैं इस मैच को रिकॉर्ड कर रहा हूं जैसा कि मैं भारत पाकिस्तान के हर मुक़ाबले में करता हूं.

मोदी-नवाज़

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मैं इस मुक़ाबले को लाइव देखने की स्थिति में नहीं होता हूं. अगर मुझे पड़ोस में पटाखों की आवाज़ सुनाई दी तो मैं उस वक़्त से मैच देखना शुरू करूंगा.

मैंने एक दो रोज़ पहले पढ़ा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ को उनकी टीम के अच्छे खेल की शुभकामनाएं देते हुए कहा, "क्रिकेट से भाईचारा बढ़ता है."

भाईचारा बढ़ता है? आप हैरत में पड़ जाएंगे मानो वो हमें किसी और ग्रह पर ले जा रहे हों.

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