सीसीटीवी कैमरे का वादा कितना प्रैक्टिकल?

सीसीटीवी कैमरा इमेज कॉपीरइट Getty

दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान आम आदमी पार्टी ने जो वादे किए, उसमें महिला सुरक्षा पर ख़ासा ज़ोर है.

'आप' ने वादा किया कि दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा के लिए सार्वजनिक स्थलों, डीटीसी बसों, बस स्टैंडों और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर वाई-फ़ाई सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे.

जानिए इस वादे को कैसे पूरा करेगी आम आदमी पार्टी और इस पर कितना खर्च आएगा?

कितने कैमरे,कितना धन?

इमेज कॉपीरइट AFP

'आप' ने चुनाव के दौरान पूरी दिल्ली में तक़रीबन दस से पंद्रह लाख वाई-फ़ाई कैमरे लगाने की बात कही थी जि‍नके ज़रिए चौबीसों घंटे राजधानी की सड़कों पर निगरानी रखी जाएगी.

अरविंद केजरीवाल के अनुसार दो हज़ार रुपए का एक वाई-फ़ाई कैमरा आता है. इस हिसाब से दस लाख कैमरे के लिए 200 करोड़ रुपये की ज़रूरत होगी.

मोटे तौर पर कहें तो साल भर में दस लाख या इससे ज़्यादा कैमरे लगाने के लिए 'आप' को एक महीने में अस्सी हज़ार से ज़्यादा कैमरे हर महीने लगाने होंगे.

क्या कैमरे लगा देने भर से काम पूरा हो जाएगा?

बीबीसी ने दिल्ली में दो सर्विलेंस कैमरा डीलरों से बात की.

इनके अनुसार दो-ढ़ाई हज़ार तक में आने वाला सस्ता वाई-फ़ाई कैमरा मौसम की मार झेल कर बारह महीने काम कर सके, ऐसा नहीं होता. पचास डिग्री सेल्यिस का तापमान, बारिश या ठंड इन कैमरों को 2 से तीन महीनों में ही बेकार कर देती है.

ऐसे में 'आप' सरकार को बढ़िया कैमरे लगाने के अलावा उन्हें थोड़-थोड़े अंतराल पर दुरुस्त करने का इंतज़ाम भी करना पड़ेगा.

कहां कहां होगा खर्च

इस योजना के लिए सात तरह के ख़र्च आएंगे.

कैमरे
डाटा रखने के लिए सर्वर
डाटा मेंटेनेंस टीम या किसी कंपनी के साथ समझौता
इंटरनेट का ख़र्च और इसके लिए मेंटेनेंस टीम
कंट्रोल रूम बनाना - कमरा, टीवी स्क्रीन, चौबीसों घंटे बिजली और पानी की व्यव्स्था
कंट्रोल रूम में लोगों की तैनाती
कैमरों के लिए मेंटेनेंस टीम

क्या कहना है 'आप' का?

इमेज कॉपीरइट AP

बीबीसी ने 'आप' के घोषणापत्र टीम के लीडर रोशन शंकर से बात की.

उन्होंने बताया कि पार्टी इस योजना पर काम करना शुरू कर चुकी है. पार्टी माइक्रोसॉफ्ट और एमेज़ोन से सर्वर मुहैया कराने के लिए बात कर रही है और इस योजना की शुरुआत मोहल्ला सभा और उन इलाकों में कैमरे लगाने से की जाएगी. उसके बाद सेंसिटिव हिस्सों में कैमरे लगाए जाएंगे.

रोशन ने माना कि इस पूरी प्रक्रिया में ज़्यादा पैसा खर्च होने की संभावना है, लेकिन अभी इसका पूरा-पूरा अंदाजा लगा पाना थोड़ा मुश्किल है.

वो कहते हैं कि साल भर के भीतर संबंधित कानूनों में बदलाव की प्रक्रिया को शुरू कर दिया जाएगा ताकि कैमरों से निगरानी करने के काम को शुरू किया जा सके.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार