जंगली हाथियों को पकड़ते हैं ये हाथी

कर्नाटक के हासन ज़िले के अलुर में हाथी पकड़ने का अभियान इमेज कॉपीरइट Karnataka Forest Department
Image caption कर्नाटक के हासन ज़िले में हाथियों की मदद से हाथी पकड़ने के एक अभियान की तस्वीरें.

यह एक अनोखा बचाव अभियान था. इसके तहत महाराष्ट्र में जान-माल को नुकसान पहुंचाने वाले चार-पांच जंगली हाथियों को पकड़ना था. और पकड़ने वाले भी हाथी ही थे.

ये हाथी इस अभियान के लिए कर्नाटक से महाराष्ट्र भेजे गए. एक वन अधिकारी इन्हें 'गैंग ऑफ़ फ़ोर' कहते हैं. ये मनुष्य और हाथी के बीच टकराव को कम कराने में विशेषज्ञ हैं.

अप्रैल 2014 से लेकर जून 2014 तक तीन-चार हाथियों के झुंड ने महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग ज़िले के सावंतवाड़ी जंगल में तीन लोगों को मार दिया और फ़सलें तबाह कर दीं.

आख़िरकार आठ फ़रवरी को चार हाथी मैसूर से सावंतवाड़ी के सफ़र पर निकले. उनके साथ उनके डॉक्टर और महावत भी थे.

दो दिन में एक हाथी

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महाराष्ट्र सरकार के मुख्य वन्य जीव रक्षक सज्जन भगत ने बीबीसी हिंदी को बताया, "सावंतवाड़ी आने के दो दिनों में उन्होंने एक नर हाथी को नियंत्रण में कर लिया है."

कर्नाटक के वन विभाग के एक अधिकारी आर गोकुल कहते हैं, "हमें सूचना मिली है कि उन्होंने दो अन्य नर हाथियों को पकड़ लिया है. एक जंगली हाथी को प्रशिक्षण देने का काम भी शुरू हो गया है."

भगत बताते हैं, "ये हाथी प्रशिक्षित हैं इसलिए वे जंगली हाथियों को घेरकर अपने नियंत्रण में ले लेते हैं. जंगली हाथियों को शांत करने के बाद उन्हें प्रशिक्षण देने की शुरुआत होती है."

भगत बताते हैं कि प्रशिक्षण देने के लिए जंगली हाथियों को एक गढ्ढे में रखा जाता है. वो कहते हैं, "गढ्ढे में फंसे हाथी के प्रशिक्षण में पहले से प्रशिक्षित हाथी मदद करते हैं. इस प्रक्रिया में एक से तीन महीने तक का वक़्त लगता है."

कई बार बचाव

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Image caption (फ़ाइल फ़ोटो)

कर्नाटक के मुख्य वन संरक्षक विनय लूथरा कहते हैं, "ये हाथी पहली बार ऐसा नहीं कर रहे. पिछले साल ही हमने कर्नाटक के हासन ज़िले के अलुर में इनकी मदद से 23 जंगली हाथी पकड़े थे."

कर्नाटक के लोगों को इन हाथियों पर गर्व है. अभिमन्यु (48 वर्ष), अर्जुन (54 वर्ष), गजेंद्र (47 वर्ष) और हर्ष (40 वर्ष) मैसूर में होने वाली दशहरा यात्रा में सबसे आगे चलते हैं और लाखों की भीड़ में भी शांत रहते हैं.

अर्जुन और अभिमन्यु पिछले 17 सालों में दर्जनों बार 750 किलो के सोने के हौदे के साथ दशहरा यात्रा में शामिल हो चुके हैं.

राज्यों की मदद

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Image caption (फ़ाइल फ़ोटो)

इनके अलावा कुछ अन्य हाथी भी ऐसे अभियानों में उनकी मदद करते हैं. ये सभी 1990 के दशक में वर्तमान छत्तीसगढ़ (तत्कालीन मध्य प्रदेश) के सरगुजा के अलावा गोवा, केरल समेत कई राज्यों में ऐसे अभियानों में शामिल हो चुके हैं.

कई राज्यों में इनका प्रयोग महावतों को प्रशिक्षित करने में किया जाता है.

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भगत कहते हैं, "अभियान का बजट 35 लाख रुपए है. हाथियों को ऐसे रास्ते से भेजा जाता है, जिस पर उनके लिए पर्याप्त भोजन हो."

मैसूर से सावंतवाड़ी पहुंचने के सफ़र में हर हाथी को 200 किलो घास के अलावा गुड़, धान की भूसी और चना खिलाया गया.

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