बिहार: मांझी समर्थकों को लगा झटका

लालू यादव, नीतीश कुमार, शरद यादव, बिहार

बिहार में पटना हाई कोर्ट ने जद-यू के आठ बाग़ी विधायकों को मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के विश्वासमत में भाग लेने पर रोक लगा दी है. मांझी को 20 फरवरी को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना है.

इससे पहले बिहार विधान सभा के अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने जद-यू नेता विजय चौधरी को मुख्य विपक्षी पार्टी के नेता के रूप में नामित किया है. इस तरह बिहार में भाजपा के स्थान पर जद-यू अब मुख्य विपक्षी पार्टी हो गई है.

पटना में स्पीकर उदय नारायण चौधरी के दफ्तर के बाहर भाजपा के कार्यकर्ताओं ने नंद किशोर यादव को विपक्ष के नेता पद से हटाने का विरोध किया.

जद-यू के अध्यक्ष शरद यादव ने जीतनराम मांझी को पार्टी से निकालते हुए उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के लिए कहा था. लेकिन मांझी ने इससे इनकार करते हुए विधानसभा में बहुमत होने का दावा किया था.

भाजपा का रुख

जनता दल (यू) के अध्यक्ष शरद यादव के कहने पर बुलाई गई विधायक दल की बैठक में नीतीश कुमार को नया नेता चुन लिया गया था. लेकिन जीतनराम मांझी ने पद छोड़ने से इनकार कर दिया था.

बाद में बिहार के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने जीतनराम मांझी से 20 फरवरी को बहुमत साबित करने को कहा.

जीतनराम मांझी के विश्वास मत पर भाजपा का क्या रुख़ होगा, इस पर पार्टी विधायकों और नेतृत्व की कई बार बैठक हो चुकी है. पार्टी प्रवक्ता शाहनवाज़ हुसैन के अलावा कई नेता ये कह चुके हैं कि भाजपा के विधायक मांझी को समर्थन देने के पक्ष में हैं और इसकी घोषणा जल्द ही कर दी जाएगी.

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Image caption अच्छे दिनों में जीतन माँझी और नीतिश

वहीं जीतनराम मांझी ने गुरुवार को एक दलित सम्मेलन में कहा कि उनका काम सिर्फ बिहार के लिए नहीं बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी फायदेमंद है और वे मर मिटने को तैयार हैं लेकिन झुकेंगे नहीं.

मांझी नीतीश कुमार के पिछले साल इस्तीफ़ा देने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री बनाए गए थे. नीतीश ने पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ दिया था.

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