मांझी रहेंगे या जाएंगे, शक्ति परीक्षण आज

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बिहार विधानसभा में आज यह फैसला होना है कि मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की सरकार रहेगी या नहीं और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को दोबारा सत्ता संभालने का मौका मिलता है या नहीं.

मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मांझी को समर्थन देने का वादा किया है.

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडे कहते हैं, "राज्य में नीतीश कुमार ने ही राजनीतिक अस्थिरता पैदा की है. वे विधासभा में अपने दल के ही महादलित समाज से आने वाले जीतन राम मांझी को हटाने के लिए चर्चा करेंगे."

नीतीश का दावा

पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजभवन से राष्ट्रपति भवन तक 130 विधायकों की परेड कराकर यह दबाव बनाया है कि उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाए.

जेडीयू के विधान परिषद सदस्य प्रो. रणवीर नंदन कहते हैं, "पार्टी ने राज्यपाल से लेकर राष्ट्रपति के समक्ष अपनी संख्या बता दी है. मांझी विरोधी दल की सहायता से बिहार की स्थिति खराब कर रहे हैं. पार्टी ने सामूहिक फ़ैसला लेकर नीतीश कुमार को फिर से सीएम बनाने का फ़ैसला लिया है."

दूसरी तरफ़ मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने नीतीश कुमार के विधानमंडल दल का नेता चुने जाने की प्रक्रिया को ही असंवैधानिक बताया है.

मांझी ने राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाक़ात के बाद दावा कर रहे हैं कि वह बहुमत साबित कर देंगे.

मुख्यमंत्री का कहना है कि वे अभी विधानमंडल दल के नेता हैं.

जैसे-जैसे शक्ति परीक्षण का समय नज़दीक आ रहा है, मांझी और नीतीश दोनों ही बहुमत के लिए 117 सदस्यों के समर्थन का जादुई आंकड़ा जुटाने में लगे हैं.

दोनों ही खेमे एक-दूसरे पर हॉर्स-ट्रेडिंग का आरोप लगा रहे हैं.

भोज की राजनीति

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इसके साथ ही राजधानी पटना में नीतीश समर्थक नेताओं के घर भोज पर राजनीति का सिलसिला भी जारी है.

पिछले 10 दिनों में श्रवण कुमार, मंजीत सिंह, लेसी सिंह, संजय सिंह, विजय सिंह और विजय कुमार चौधरी समेत राजद विधायक दल के नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी लज़ीज़ खाने पर पार्टी विधायकों को दावत दे चुके हैं.

मांझी के बहुमत साबित करने के दिन से ठीक एक दिन पहले रात का भोज नीतीश कुमार के घर पर हुआ, जिसे मत-विभाजन से पहले बेहद अहम माना गया.

भोज राजनीति पर मांझी समर्थक मंत्री नरेंद्र सिंह कहते हैं, "यह सब ठगी, प्रलोभन और लोभ-लालच है. यह भी रिश्वतखोरी ही है. जो कभी चाय नहीं पिलाता था, वह आज भारी-भारी व्यंजन खिला रहा है."

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लेकिन वे मांझी को भाजपा के समर्थन देने के मुद्दे पर कुछ भी बोलने से बचते हैं.

पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस और सीपीआई को अपने समर्थन में खड़ा कर लिया है.

जबकि मांझी को कहीं से कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला है.

उन्हें अपनी पार्टी के नीतीश विरोधी गुट के साथ आने की उम्मीद है लेकिन जब तक वे कम से कम 30 विधायकों का समर्थन नहीं जुटा पाएंगे, तब तक उन्हें भाजपा सदस्यों का समर्थन नहीं मिलेगा.

सारी राजनीति दलितों के 22 प्रतिशत वोट को ध्यान में रखकर हो रही है. बिहार विधानसभा के चुनाव इसी साल होने वाले हैं इसलिए नेताओं की नज़र तात्कालिक लाभ से ज़्यादा अगले चुनाव पर है.

कुल विधायक 243
वर्तमान संख्या 233
जनता दल (यूनाइटेड) 111
भारतीय जनता पार्टी 87
राष्ट्रीय जनता दल+कांग्रेस 24+5
सीपीआई+ निर्दलीय 1+5

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