तीस्ता की गिरफ़्तारी पर रोक बरकरार

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सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और उनके पति जावेद आनंद की अंतरिम ज़मानत पर फ़ैसला सुरक्षित रखा है.

इससे पहले 13 फरवरी को कोर्ट ने दोनों की गिरफ़्तारी पर 19 फ़रवरी तक रोक लगाई थी.

दोनों की ज़मानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की नई पीठ ने गुरुवार को सुनवाई करते हुए गुजरात सरकार से पूछा कि पूछताछ के लिए उनकी गिरफ़्तारी क्यों ज़रूरी है.

पिछले हफ़्ते ही गुजरात हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी ख़ारिज कर दी थी. इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.

पुलिस का आरोप

गुजरात पुलिस ने तीस्ता और उनके पति जावेद आनंद पर आरोप लगाया है कि दोनों ने 2002 में गुजरात दंगों में गुलबर्गा सोसायटी में मारे गए लोगों का स्मारक बनाने के लिए जमा चंदे का दुरुपयोग किया.

तीस्ता और जावेद इन आरोपों को राजनीति प्रेरित बताते हैं.

बीते साल जनवरी में एक शिकायत पर अहमदाबाद की क्राइम ब्रांच शाखा ने तीस्ता, जावेद आनंद और गुलबर्गा सोसायटी में मारे गए कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफ़री के बेटे तनवीर के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की थी.

गुलबर्गा सोसायटी के पीड़ितों ने तीस्ता सीतलवाड़ और अन्य के ख़िलाफ़ उनके नाम पर विदेशों से चंदा लेने और उसके दुरुपयोग की शिकायत की थी.

इसी मामले में गुजरात पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करना चाहती है.

पुलिस पर आरोप

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Image caption सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात पुलिस से पूछा है कि तीस्ता को वह गिरफ्तार क्यों करना चाहती है.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने गुजरात सरकार पर तीस्ता और उनके पति को परेशान करने का आरोप लगाया है.

उनका कहना है कि दोनों ने 2002 के गुजरात दंगों के पीड़ितों के अधिकारों के लिए लगातार लड़ाई लड़ी है. इस वजह से गुजरात सरकार उन्हें परेशान कर रही है.

इस पर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने एक ट्वीट में कहा, ''...उत्पीड़न और ज़ुल्म शासन का गुजरात मॉडल है."

वहीं सोशल मीडिया पर कुछ लोग तीस्ता की गिरफ़्तारी की कोशिश को सही बता रहे हैं.

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