मांझी-नीतीश प्रकरण: 11 ख़ास बातें

राज्यपाल ने बिहार के मुख्यमंत्री का इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया

1. बिहार के कार्यवाहक राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी का इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया है. उन्होंने मांझी से नई सरकार के गठन तक अपने पद पर बने रहने को कहा है.

2. 20 फ़रवरी को नीतीश कुमार दोबारा राज्यपाल से मिले.

3. जनता दल यूनाइटेड के नेता नीतीश कुमार ने कहा है कि 9 फ़रवरी को बिहार के राज्यपाल से मिल कर उन्होंने सरकार बनाने का दावा पेश किया था, वे उस पर आज भी क़ायम हैं.

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4. 9 फ़रवरी को ही राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और एक निर्दलीय ने राज्यपाल से मिल कर नीतीश का समर्थन किया.

5. 20 फ़रवरी को सुबह मांझी को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना था. पर तय समय से पहले ही उन्होंने अपना इस्तीफ़ा राज्यपाल को सौंप दिया.

6. 20 फ़रवरी को मांझी ने इस्तीफ़ा देते हुए आरोप लगाया था कि उनका साथ देने वाले विधायकों को धमकियां दी जा गई थीं.

7. 19 फ़रवरी को अदालत ने जनता दल यूनाइटेड के आठ निलंबित विधायकों को विश्वास मत प्रस्ताव पर वोट देने से मना कर दिया था.

8. 19 फ़रवरी को भारतीय जनता पार्टी की राज्य इकाई ने व्हिप जारी कर अपने 87 विधायकों से विश्वास मत के दौरान सदन में मौजूद रहने और मांझी के पक्ष में वोट देने को कहा था.

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9. 17 फ़रवरी को मांझी के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के इनकार करने पर उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था.

10. 8 फ़रवरी को जीतन राम मांझी ने पद से इस्तीफ़ा देने से मना करने के बाद दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाक़ात की और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की तरीफ़ की.

11. 7 फ़रवरी इसके पहले जनता दल यूनाइटेड ने नीतीश कुमार को बिहार विधानमंडल का नया नेता चुना और जीतन राम मांझी से मुख्यमंत्री पद से हट जाने को कहा था.

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